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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 Chapter 3 बस की यात्रा
  • NCERT Solution For Class 8 Hindi Vasant Bhag 3

    बस की यात्रा Here is the CBSE Hindi Chapter 3 for Class 8 students. Summary and detailed explanation of the lesson, including the definitions of difficult words. All of the exercises and questions and answers from the lesson's back end have been completed. NCERT Solutions for Class 8 Hindi बस की यात्रा Chapter 3 NCERT Solutions for Class 8 Hindi बस की यात्रा Chapter 3 The following is a summary in Hindi and English for the academic year 2023-24. You can save these solutions to your computer or use the Class 8 Hindi.

    Question 1
    CBSEENHN8000510

    “मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा।”
    • लेखक के मन में हिस्सेदार साहब के लिए श्रद्धा क्यों जग गई?

    Solution
    पुलिया के ऊपर बस का टायर पंचर (फिस्स) हो गया। जिससे बस जोर से हिलकर रुक गई। अगर यह बस तेज गति से चल रही होती तो अवश्य ही उछलकर नाले में गिर जाती। ऐसे में लेखक ने कंपनी के हिस्सेदार की ओर श्रद्धाभाव से देखा। यह श्रद्धा इसलिए जागी क्योंकि हिस्सेदार केवल अपने स्वार्थ हेतु लाचार था। वह जानता था कि बस के टायर खराब हैं और कभी भी लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। फिर भी निरंतर बस को सड़क पर दौड़ा रहा था। यात्रियों की चिंता किए बिना धन बटोरने पर लगा था।
    Question 31
    CBSEENHN8000540

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस-कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे। हमने उनसे पूछा-“यह बस चलती भी है?” वह बोले-“चलती क्यों नहीं है जी। अभी चलेगी।” हमने कहा- “वही तो हम देखना चाहते हैं। अपने आप चलती है यह? हाँ जी, और कैसे चलेगी?”
    गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।
    हम आगा-पीछा करने लगे। डॉक्टर मित्र ने कहा- “डरो मत, चलो! बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।”
    हम बैठ गए। जो छोड़ने आए थे, वे इस तरह देख रहे थे जैस अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आँखें कह रही थीं- “आना-जाना तो लगा ही रहता है। आया है, सो जाएगा-राजा, रंक, फकीर। आदमी को कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए।”

    लेखक और उसके मित्रों ने जब बस को देखा तो उन्हें कैसा महसूस हुआ?
    • कि यह बस तो जल्दी पहुँचा देगी।
    • कि यह बस चलेगी भी या नहीं।
    • कि यह बस धीरे-धीरे चलेगी।
    • कि यह बस यात्रियों से ज्यादा ही भरी हुई है।

    Easy
    Question 32
    CBSEENHN8000541

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस-कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे। हमने उनसे पूछा-“यह बस चलती भी है?” वह बोले-“चलती क्यों नहीं है जी। अभी चलेगी।” हमने कहा- “वही तो हम देखना चाहते हैं। अपने आप चलती है यह? हाँ जी, और कैसे चलेगी?”
    गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।
    हम आगा-पीछा करने लगे। डॉक्टर मित्र ने कहा- “डरो मत, चलो! बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।”
    हम बैठ गए। जो छोड़ने आए थे, वे इस तरह देख रहे थे जैस अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आँखें कह रही थीं- “आना-जाना तो लगा ही रहता है। आया है, सो जाएगा-राजा, रंक, फकीर। आदमी को कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए।”

    डॉक्टर मित्र ने उसके बारे में क्या कहा?
    • यह अनुभवी है हमें प्यार से अपनी गोद में बिठाएगी, कहीं धोखा नहीं देगी।
    • इस बस का तो इलाज करवाना चाहिए।
    • यह बस सवारियाँ लादने के काबिल नहीं।
    • यह बस गंतव्य तक नहीं पहुंच पाएगी।

    Easy
    Question 33
    CBSEENHN8000542

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस-कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे। हमने उनसे पूछा-“यह बस चलती भी है?” वह बोले-“चलती क्यों नहीं है जी। अभी चलेगी।” हमने कहा- “वही तो हम देखना चाहते हैं। अपने आप चलती है यह? हाँ जी, और कैसे चलेगी?”
    गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।
    हम आगा-पीछा करने लगे। डॉक्टर मित्र ने कहा- “डरो मत, चलो! बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।”
    हम बैठ गए। जो छोड़ने आए थे, वे इस तरह देख रहे थे जैस अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आँखें कह रही थीं- “आना-जाना तो लगा ही रहता है। आया है, सो जाएगा-राजा, रंक, फकीर। आदमी को कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए।”

    बस पर चढ़ने वाले लोग लेखक व उसके मित्रों को कैसी विदाई दे रहे थे?
    • भावभीनी विदाई
    • अंतिम रूप में दी जाने वाली सहानुभूतिपूर्ण विदाई
    • आत्मिय भाव की विदाई
    • सजल आँखों से दी जाने वाली विदाई

    Easy
    Question 34
    CBSEENHN8000543

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस-कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे। हमने उनसे पूछा-“यह बस चलती भी है?” वह बोले-“चलती क्यों नहीं है जी। अभी चलेगी।” हमने कहा- “वही तो हम देखना चाहते हैं। अपने आप चलती है यह? हाँ जी, और कैसे चलेगी?”
    गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।
    हम आगा-पीछा करने लगे। डॉक्टर मित्र ने कहा- “डरो मत, चलो! बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।”
    हम बैठ गए। जो छोड़ने आए थे, वे इस तरह देख रहे थे जैस अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आँखें कह रही थीं- “आना-जाना तो लगा ही रहता है। आया है, सो जाएगा-राजा, रंक, फकीर। आदमी को कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए।”

    ‘आया है सो जाएगा राजा, रक, फकीर’ पंक्ति का क्या आशय है?


    • राजा, रंक एवं फकीर एक ही श्रेणी के माने हैं।
    • राजा, रंक एवं फकीर सभी को समान रूप से प्रेम करना चाहिए।
    • राजा हो, भिखारी हो या साधु संत सभी को एक-न-एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना है।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 35
    CBSEENHN8000544

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस-कंपनी के एक हिस्सेदार भी उसी बस से जा रहे थे। हमने उनसे पूछा-“यह बस चलती भी है?” वह बोले-“चलती क्यों नहीं है जी। अभी चलेगी।” हमने कहा- “वही तो हम देखना चाहते हैं। अपने आप चलती है यह? हाँ जी, और कैसे चलेगी?”
    गज़ब हो गया। ऐसी बस अपने आप चलती है।
    हम आगा-पीछा करने लगे। डॉक्टर मित्र ने कहा- “डरो मत, चलो! बस अनुभवी है। नयी-नवेली बसों से ज्यादा विश्वसनीय है। हमें बेटों की तरह प्यार से गोद में लेकर चलेगी।”
    हम बैठ गए। जो छोड़ने आए थे, वे इस तरह देख रहे थे जैस अंतिम विदा दे रहे हैं। उनकी आँखें कह रही थीं- “आना-जाना तो लगा ही रहता है। आया है, सो जाएगा-राजा, रंक, फकीर। आदमी को कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए।”

    ‘कूच करने के लिए एक निमित्त चाहिए’ ऐसा लेखक ने क्यों कहा?

    • आगे बढ़ने से पूर्व कुछ उद्देश्य होना चाहिए।
    • आगे बढ़ने से पहले सोचो।
    • आगे बढ्कर पीछे नहीं हटना चाहिए।
    • आगे बढ्कर हार के बारे में न सोचो।

    Easy
    Question 36
    CBSEENHN8000545

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड्कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

    ऐसा लेखक ने क्यों कहा कि गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों के वक्त यह जवान रही होगी?
    • बस का साथ सभी लोग नहीं दे रहे थे।
    • जिस प्रकार असहयोग आंदोलन में लोग पहले, गाँधीजी का साथ नहीं दे रहे थे वैसे ही बस के सभी पुर्जे भी मिलकर नहीं चल रहे थे।
    • बस गाँधीजी के समय की थी।
    • बस पर अंकित चिन्ह स्वतंत्रता आंदोलन की कहानी कह रहे थे।

    Easy
    Question 37
    CBSEENHN8000546

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड्कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

    हर हिस्सा दूसरे हिस्से से असहयोग क्यों कर रहा था?
    • क्योंकि बस बीचोबीच से टूट रही थी।
    • क्योंकि सभी हिस्से टूटे हुए थे।
    • क्योंकि बस का कोई हिस्सा दूसरे से मिलकर नहीं चल रहा था।
    • क्योंकि टूटी बस में लोग बैठ नहीं पा रहे थे।

    Easy
    Question 38
    CBSEENHN8000547

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड्कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

    आठ- दस मील के बाद क्या हुआ?
    • बस सहज हो गई, बिल्कुल आराम से चलने लगी।
    • बस का टायर खराब हो गया।
    • बस धीमी गति से चलने लगी।
    • बस चलते-चलते बंद हो गई।

    Easy
    Question 39
    CBSEENHN8000548

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड्कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

    बस की सीटों के बारे में लेखक ने क्या कहा?
    • बस की सीटें मजबूत थीं।
    • बस की सीटें सुंदर थीं।
    • बस की सीटें इतनी खराब थी कि बस चलने पर यह समझ पाना कठिन था कि वे सीटें पर बैठे है या सीटें उन पर।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 40
    CBSEENHN8000549

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस सचमुच चल पड़ी और हमें लगा कि यह गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी। उसे ट्रेनिंग मिल चुकी थी। हर हिस्सा दूसरे से असहयोग कर रहा था। पूरी बस सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौर से गुजर रही थी। सीट का बॉडी से असहयोग चल रहा था। कभी लगता सीट बॉडी को छोड्कर आगे निकल गई है। कभी लगता कि सीट को छोड़कर बॉडी आगे भागी जा रही है। आठ-दस मील चलने पर सारे भेदभाव मिट गए। यह समझ में नहीं आता था कि सीट पर हम बैठे हैं या सीट हम पर बैठी है।

    गद्याशं में ‘बस के जवान रहने’ से क्या तात्पर्य है?
    • बस का सही होना
    • बस का नई होना
    • बस का सही तरीके से चलना
    • दिए गए सभी

    Easy
    Question 41
    CBSEENHN8000550
    Question 42
    CBSEENHN8000551

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस की रफ्तार अब पंद्रह-बीस मील हो गई थी। मुझ उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था। ब्रेक फेल हो सकता है, स्टीयरिंग टूट सकता है। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे- भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठ थे। मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था। जो भी पेड़ आता, डर लगता कि इससे बस टकराएगी। वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता। झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।

    लेखक को बस पर भरोसा क्यों नहीं रहा?
    • क्योंकि बस बीच-बीच में रुक रही थी?
    • क्योंकि उसने सोच लिया था कि कभी भी बस का ब्रेक फेल हो सकता है या स्टीरिंग टूट सकता है।
    • क्योंकि बस तेजी नहीं पकड़ रही थी।
    • क्योंकि ड्राइवर परेशान था।

    Easy
    Question 43
    CBSEENHN8000552
    Question 44
    CBSEENHN8000553

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस की रफ्तार अब पंद्रह-बीस मील हो गई थी। मुझ उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था। ब्रेक फेल हो सकता है, स्टीयरिंग टूट सकता है। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे- भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठ थे। मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था। जो भी पेड़ आता, डर लगता कि इससे बस टकराएगी। वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता। झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।

    लेखक को हर पेड़ दुश्मन क्यों लग रहा था?
    • पेड़ बहुत अधिक थे।
    • उसे ऐसा लगता कि बस पेड़ से टकराएगी और हम मर जाएँगे।
    • रास्ता तंग था।
    • बस की ब्रेक फेल थे गई थी।

    Easy
    Question 45
    CBSEENHN8000554

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बस की रफ्तार अब पंद्रह-बीस मील हो गई थी। मुझ उसके किसी हिस्से पर भरोसा नहीं था। ब्रेक फेल हो सकता है, स्टीयरिंग टूट सकता है। प्रकृति के दृश्य बहुत लुभावने थे। दोनों तरफ हरे- भरे पेड़ थे जिन पर पक्षी बैठ थे। मैं हर पेड़ को अपना दुश्मन समझ रहा था। जो भी पेड़ आता, डर लगता कि इससे बस टकराएगी। वह निकल जाता तो दूसरे पेड़ का इंतजार करता। झील दिखती तो सोचता कि इसमें बस गोता लगा जाएगी।

    झील को देखते ही लेखक के मन में क्या ख्याल अाता था?
    • कि बस झील में डुबकी लगाएगी।
    • झील के पास बस खड़ी हो जाएगी।
    • झील का जल सड़क पर फैल जाएगा।
    • गर्मी अधिक होने के कारण लेखक झील में नहाना चाहता था।

    Easy
    Question 49
    CBSEENHN8000558

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    क्षीण चांदनी में वृक्षों की छाया के नीचे वह बस बड़ी दयनीय लग रही थी। लगता जैसे कोई मग थककर बैठ गई हो। हमें ग्लानि हो रही थी कि बेचारी पर लदकर हम चले आ रहे हैं। अगर इसका प्राणांत हो गया तो इस बियाबान में हमें इसकी अंत्येष्टि करनी पड़ेगी।

    लेखक के मन में बस के बारे में क्या विचार आया?

    • यात्रियों को किसी दूसरी बस में बिठा देना चाहिए जिससे बस परेशान न हो।
    • बस को ठीक करने के लिए किसी अच्छे कारीगर को बुलाना चाहिए।
    • उसे लगा कि यदि इस वृद्धा का देहांत हो गया तो क्रिया-कर्म इसी जंगल में करना पड़ेगा अर्थात् यदि यहाँ बस ठस्स हो गई तो इसके पुर्जे भी हाथ न आएँगे।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 51
    CBSEENHN8000560

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    ऐेक पुलिया के ऊपर पहुँचे ही थे कि एक टायर फिस्स करके बैठ गया। वह बहुत जोर से हिलकर थम गई। अगर स्पीड में होती तो उछलकर नाले में गिर जाती। मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम सब मर जाते तो देवता बाँहे पसारे उसका इंतजार करते। कहते- “वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।”

    पुलिया पर पहुँचते ही क्या हुआ?
    • बस ठस्स हो गई
    • बस बंद हो गई
    • बस पलट गई
    • बस का टायर पंचर हो गया

    Easy
    Question 52
    CBSEENHN8000561

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक पुलिया के ऊपर पहुँचे ही थे कि एक टायर फिस्स करके बैठ गया। वह बहुत जोर से हिलकर थम गई। अगर स्पीड में होती तो उछलकर नाले में गिर जाती। मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम सब मर जाते तो देवता बाँहे पसारे उसका इंतजार करते। कहते- “वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।”

    लेखक ने कंपनी के हिस्सेदार की ओर श्रद्धाभाव से क्यों देखा?
    • वह जानता था कि बस के पहिए खराब हैं।
    • उसे अपना लोभ-लालच सता रहा था।
    • उसे मालूम था कि बस की ऐसी अवस्था से लोगों की जान जा सकती है।
    • उपर्युक्त सभी।

    Easy
    Question 53
    CBSEENHN8000562

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक पुलिया के ऊपर पहुँचे ही थे कि एक टायर फिस्स करके बैठ गया। वह बहुत जोर से हिलकर थम गई। अगर स्पीड में होती तो उछलकर नाले में गिर जाती। मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम सब मर जाते तो देवता बाँहे पसारे उसका इंतजार करते। कहते- “वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।”

    ‘उत्सर्ग की भावना दुर्लभ है’ इन शब्दों का क्या अर्थ है?


    • निरंतर आगे बढ़ने की चाह
    • मुश्किल से उद्देश्य पाना
    • कंपनी का बस के प्रति मोह न त्यागना और उस निरंतर चलाना
    • लोगों के प्रति सचेत न होना।

    Easy
    Question 54
    CBSEENHN8000563

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक पुलिया के ऊपर पहुँचे ही थे कि एक टायर फिस्स करके बैठ गया। वह बहुत जोर से हिलकर थम गई। अगर स्पीड में होती तो उछलकर नाले में गिर जाती। मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम सब मर जाते तो देवता बाँहे पसारे उसका इंतजार करते। कहते- “वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।”

    कंपनी के हिस्सेदार के बारे में लेखक के मन में क्या भाव उठ रहे थे?

    • यह आदमी महान है।
    • इसमें इस जर्जर बस को चलवाने का साहस है।
    • यह अपना और लोगों का बलिदान देने को भी तैयार है।
    • उपर्युक्त सभी।

    Easy
    Question 55
    CBSEENHN8000564

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक पुलिया के ऊपर पहुँचे ही थे कि एक टायर फिस्स करके बैठ गया। वह बहुत जोर से हिलकर थम गई। अगर स्पीड में होती तो उछलकर नाले में गिर जाती। मैंने उस कंपनी के हिस्सेदार की तरफ पहली बार श्रद्धाभाव से देखा। वह टायरों की हालत जानते हैं फिर भी जान हथेली पर लेकर इसी बस से सफर कर रहे हैं। उत्सर्ग की ऐसी भावना दुर्लभ है। सोचा, इस आदमी के साहस और बलिदान भावना का सही उपयोग नहीं हो रहा है। इसे तो किसी क्रांतिकारी आंदोलन का नेता होना चाहिए। अगर बस नाले में गिर पड़ती और हम सब मर जाते तो देवता बाँहे पसारे उसका इंतजार करते। कहते- “वह महान आदमी आ रहा है जिसने एक टायर के लिए प्राण दे दिए। मर गया, पर टायर नहीं बदला।”

    बस के हिस्सेदार को क्रांतिकारी का नाम लेखक क्यों देना चाहता था?
    • उसे बस में बैठे लोगों की चिंता न थी।
    • जिस प्रकार क्रांतिकारी एक उद्देश्य से बढ़ते हैं वैसे ही बस का हिस्सेदार भी किसी की परवाह किए बिना केवल बस को चलाने व लाभ कमाने के उद्देश्य से प्रेरित था।
    • वह अपने उद्देश्य के प्रति कटिबद्ध था।
    • वह अपनी बुद्धि से सही-गलत सोच पाने में भी असमर्थ था।

    Easy