भगवान के डाकिए

Question
CBSEENHN8000653

आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिट्ठियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए बस पंक्तियाँ लिखिए।

Solution

आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। इससे व्यक्ति जब चाहे, जहाँ चाहे, घर बैठे-बैठे बात कर सकता है। अपने विचार लिखकर भेज सकता है और साथ ही दूसरे का उत्तर भी पा सकता है। दूसरी ओर बादल व पक्षियों की चिट्ठियाँ शांत हैं। वे चुपचाप बहकर अपना ईश्वरीय संदेश दूर-दराज के देशों तक पहुँचा कर विश्व-बंधुत्व की भावना फैलाना चाहते हैं। ये पूर्णतया मौन रहते है। इनके अंतर्मन की आवाज व ईश्वर के संदेश को प्रकृति अर्थात् पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ समझ लेते हैं लेकिन मनुष्य उनका संदेश समझने में असमर्थ रहता है।

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Some More Questions From भगवान के डाकिए Chapter

किन पंक्तियों का भाव है-
प्रकृति देश-देश में भेदभाव नहीं करती। एक देश से उठा बादल दूसरे देश में बरस जाता है।


पक्षी और बादल की चिट्टियों में पेड़-पौधे, पानी और पहाड़ क्या पढ़ पाते हैं?

“एक देश की धरती दूसरे देश को सुगंध भेजती है” - कथन का भाव स्पष्ट कीजिए। 

आज विश्व में कहीं भी संवाद भेजने और पाने का एक बड़ा साधन इंटरनेट है। पक्षी और बादल की चिट्ठियों की तुलना इंटरनेट से करते हुए बस पंक्तियाँ लिखिए।

'हमारे जीवन में डाकिए की भूमिका क्या हैं? इस विषय पर दस वाक्य लिखिए।'

पक्षी और बादल की चिट्टियों के आदान-प्रदान को आप किस दृष्टि से देख सकते हैं?

डाकिया, इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब (डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू www.) तथा पक्षी और बादल-इन तीनों संवादवाहकों के विषय में अपनी कल्पना से एक लेख तैयार कीजिए। “चट्टियों की अनूठी दुनिया” पाठ का सहयोग ले सकते हैं।

भगवान के डाकिए कौन हैं?

‘भगवान के डाकिए’ कविता का मूलभाव स्पष्ट कीजिए।

‘भगवान के डाकिए’ कविता से क्या संदेश मिलता है?