सूर के पद

Question
CBSEENHN8001029

‘तैं ही पूत अनोखी जायौ’-पंक्तियों में ग्वालन के मन के कौन-से भाव मुखरित हो रहे हैं?

Solution

‘तैं ही पूत अनोखी जायौ’ अर्थात् गोपी का यशोदा को यह कहना कि क्या तुम्हारा पुत्र ही अनोखा है? इसमें गोपी का शिकायत रूप में उलाहना का भाव मुखरित हो रहा है। 

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श्रीकृष्ण गोपियों का माखन चुरा-चुराकर खाते थे इसलिए उन्हें माखन चुरानेवाला भी कहा गया है। इसके लिए एक शब्द दिजिए।

श्रीकृष्ण के लिए पाँच पर्यायवाची शब्द लिखिए।

कुछ शब्द परस्पर मिलते-जुलते अर्थवाले होते हैं, उन्हें पर्यायवाची कहते हैं। और कुछ विपरीत अर्थवाले भी। समानार्थी शब्द पर्यायवाची कहे जाते हैं और विपरीतार्थक शब्द विलोम, जैसे-
पर्यायवाची -      चंद्रमा-शशि, इंदु, राका
                    मधुकर-भ्रमर, भौंरा, मधुप
                   सूर्य-रवि, भानु, दिनकर

विपरीतार्थक - दिन-रात
                श्वेत-श्याम
                शीत-उष्ण
पाठों से दोनों प्रकार के शब्दों को खोजकर लिखिए।

चोटी बढ़ने की बात कौन किससे कर रहा है?

माँ ने चोटी बढ़ने का क्या प्रलोभन दिया?

कृष्ण कैसी चोटी चाहते हैं?

गोरस से आप क्या समझते हैं?

गोपी ने यशोदा को यह उलाहना क्यों दिया कि क्या तूने अनोखा पुत्र पैदा किया है?

आपके अनुसार श्रीकृष्ण बाल सखाओं के साथ दोपहर को ही माखन चोरी क्यों करते हैं?

श्रीकृष्ण किस लोभ में दूध पीने को तैयार होते हैं?