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Question
CBSEENHN8001268

गवरे ने वस्त्र धारण करने को गलत क्यों ठहराया?
  • मनुष्य की औकात नज़र आने लगती है।
  • उसकी खूबसूरती ढक जाती है।
  • वह बदसूरत दिखता है।
  • दिए गए सभी।

Solution

D.

दिए गए सभी।

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Some More Questions From टोपी Chapter

यदि राजा के राज्य के सभी कारीगर अपने-अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त कर रहे होते तब गवरइया के साथ उन कारीगरों का व्यवहार कैसा होता?

चारों कारीगर राजा के लिए काम कर रहे थे। एक रजाई बना रहा था। दूसरा अचकन के लिए सूत कात रहा था। तीसरा बागा चुन रहा था। चौथा राजा की सातवीं रानी की दसवीं संतान के लिए झब्बे सिल रहा था। उन चारों ने राजा का काम रोककर गवरइया का काम क्यों किया?

गाँव की बोली में कई शब्दों का उच्चारण अलग होता है। उनकी वर्तनी भी बदल जाती है। जैसे गवरइया गौरेया का ग्रामीण उच्चारण है। उच्चारण के अनुसार इस शब्द की वर्तनी लिखी गई है। फुँदना, फुलगेंदा का बदला हुआ रूप है। कहानी में अनेक शब्द हैं जो ग्रामीण उच्चारण में लिखे गए हैं, जैसे-मुलुक-मुल्क, खमा-क्षमा, मजूरी-मजदूरी, मल्लार-मल्हार इत्यादि। आप क्षेत्रीय या गाँव की बोली में उपयोग होनेवाले कुछ ऐसे शब्दों को खोजिए और उनका मूल रूप लिखिए, जैसे- टेम-टाइम टेसन/टिसन-स्टेशन।

मुहावरों के प्रयोग से भाषा आकर्षक बनती है। मुहावरे वाक्य के अंग होकर प्रयुक्त होते हैं। इनका अक्षरश: अर्थ नहीं बल्कि लाक्षणिक अर्थ लिया जाता है। पाठ में अनेक मुहावरे आए हैं। टोपी को लेकर तीन मुहावरे हैं; जैसे-कितनों को टोपी पहनानी पड़ती है। शेष मुहावरों को खोजिए और उनका अर्थ ज्ञात करने का प्रयास कीजिए।

गवरा और गवरइया परम-संगी रथे-कैसे?

गवरइया ने गवरा को आदमी के बारे में क्या कहा?

गवरा ने आदमी के कपड़े पहनने को गलत क्यों ठहराया?

गवरइया की टोपी कैसे बनी?

गवरइया के टोपी बनाने हेतु धुनिए, कोरी, बुनकर दरज़ी को क्या मज़बूरी दी?

टोपी पहनते ही गवरइया के मन में क्या इच्छा जागी?