सुदामा चरित

Question
CBSEENHN8000889

नीचे लिखे काव्यांशों को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
कै वह टूटी-सी छानी हती, कहाँ कंचन के अब धाम सुहावत।
कै पग में पनही न हती, कहाँ लै गजराजहु ठाढ़े महावत।।
भूमि कठोर पै रात कटै, कहाँ कोमल सज पै नींद न आवत।।
कै जुरतो नहिं कोदो सवाँ, प्रभु के परताप ते दाख न भावत।। 

सुदामा ने अपनी झोपड़ी में क्या बदलाव देखा?

  • झोपड़ी बड़ी हो गई।
  • स्वर्ण-महल में बदल गई।
  • उसकी दशा देखने योग्य न थी।
  • जीर्ण-शीर्ण हो गई।

Solution

B.

स्वर्ण-महल में बदल गई।

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Some More Questions From सुदामा चरित Chapter

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।
विपति कसौटी जे कसे तेई साँचे मीत।।
इस दोहे में रहीम ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है। इस दोहे से सुदामा चरित की समानता किस प्रकार दिखती है? लिखिए।

“पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सो पग धोए”
ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से एक अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण छाँटिए।

इस कविता को एकांकी में बदलिए और उसका अभिनय कीजिए।

कविता के उचित सस्वर वाचन का अभ्यास कीजिए।

‘मित्रता’ संबंधी दोहों का संकलन कीजिए।

सुदामा की वेशभूषा क्या दर्शाती है?

मित्र सुदामा से मिलकर श्रीकृष्णा की दशा का वर्णन कीजिए।

श्रीकृष्ण ने सुदामा को क्या उलाहना दिया?

द्वारिका से लौटते समय सुदामा कृष्णा के व्यवहार से खीझ क्यों रहे थे?

अपने गाँव लौटने पर सुदामा के भ्रमित होने का कारण क्या था?