सुदामा चरित

Question
CBSEENHN8000856

सुदामा ने कभी श्रीकृष्ण को दया का सागर कहा है, कभी उनके प्रति खीझ का भाव प्रकट किया है। इन विभिन्न प्रतिक्रियाओं के पीछे क्या कारण था?

Solution

मनुष्य के स्वभाव में समयानुसार परिवर्तन होते है। आशा पूरी होने पर व्यक्ति दूसरे को साधुवाद देता है अन्यथा वह खीझता या दुखी होता है। यही कारण है कि सुदामा ने कभी श्रीकृष्ण की दया का सागर कहा तो कभी उन पर खीझ उठा। क्योंकि उसके दुख से दुखी होकर जब कृष्ण रो पड़े तो वे उसे दया के सागर प्रतीत हुए लेकिन विदाई के समय जब उन्होंनं कोई मदद न की तो सुदामा खीझ उठा।

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द्रुपद और द्रोणाचार्य भी सहपाठी थे, इनकी मित्रता और शत्रुता की कथा महाभारत से खोजकर सुदामा के कथानक से तुलना कीजिए।

उच्च पद पर पहुँचकर या अधिक समृद्ध होकर व्यक्ति अपने निर्धन माता-पिता-भाई-बंधुओं से नजर फेरने लग जाता है, ऐसे लोगों के लिए सुदामा चरित कैसी चुनौती खड़ी करता है? लिखिए।

अनुमान कीजिए यदि आपका कोई अभिन्न मित्र आपसे बढ़त वर्षो बाद मिलने आए तो आप को कैसा अनुभव होगा?

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीति।
विपति कसौटी जे कसे तेई साँचे मीत।।
इस दोहे में रहीम ने सच्चे मित्र की पहचान बताई है। इस दोहे से सुदामा चरित की समानता किस प्रकार दिखती है? लिखिए।

“पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सो पग धोए”
ऊपर लिखी गई पंक्ति को ध्यान से पढ़िए। इसमें बात को बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर चित्रित किया गया है। जब किसी बात को इतना बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया जाता है तो वहाँ पर अतिशयोक्ति अलंकार होता है। आप भी कविता में से एक अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण छाँटिए।

इस कविता को एकांकी में बदलिए और उसका अभिनय कीजिए।

कविता के उचित सस्वर वाचन का अभ्यास कीजिए।

‘मित्रता’ संबंधी दोहों का संकलन कीजिए।

सुदामा की वेशभूषा क्या दर्शाती है?

मित्र सुदामा से मिलकर श्रीकृष्णा की दशा का वर्णन कीजिए।