बस की यात्रा

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Question
CBSEENHN8000529

‘बस की यात्रा’ पाठ से क्या संदेश मिलता है?

Solution

इस पाठ से यह संदेश मिलता है कि समयानुसार प्रत्येक वस्तु का नवीनीकरण आवश्यक है। जैस बस अब बिल्कुल भी चलने के लायक नहीं थी। बस के हिस्सेदारों का कर्तव्य बनता था कि वे उस बस को जबरदस्ती चलाने की बजाय नई बस लेते।

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Some More Questions From बस की यात्रा Chapter

बस, वश, बस तीन शब्द हैं - इनमें बस सवारी के अर्थ मैं, वश अधीनता के अर्थ मैं, और बस पर्याप्त (काफी) के अर्थ में प्रयुक्त होता है, जैसे-बस से चलना होगा। मेरे वश में नहीं है। अब बस करो।
• उपर्युक्त वाक्य के समान तीनों शब्दों से युक्त आप भी दो-दो वाक्य बनाइए।

“हम पाँच मित्रों ने तय किया कि शाम चार बजे की बस से चलें। पन्ना से इसी कंपनी की बस सतना के लिए घंटे भर बाद मिलती है।”
ने, की. से आदि शब्द वाक्य के दो शब्दों के बीच संबंध स्थापित कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को कारक कहते हैं। इसी तरह जब दो वाक्यों को एक साथ जोड़ना होता है ‘कि’ का प्रयोग होता है।
• कहानी में से दोनों प्रकार के चार वाक्यों को चुनिए।

“हम फौ़रन खिड़की से दूर सरक गए। चाँदनी में रास्ता टटोलकर वह रेंग रही थी।”
दिए गए वाक्यों में आई ‘सरकना’ और ‘रेंगना’ जैसी क्रियाएँ दो प्रकार की गति बताती है। ऐसी कुछ और क्रियाएँ एकत्र कीजिए जो गति के लिए प्रयुक्त होती हैं, जैसे- घूमना इत्यादि। उन्हें वाक्यों में प्रयोग कीजिए!

“काँच बहुत कम बचे थे। जो बचे थे उनसे हमें बचना था।”
इस वाक्य में ‘बच’ शब्द को दो तरह से प्रयोग किया गया है। एक ‘शेष’ के अर्थ में और दूसरा ‘सुरक्षा’ के अर्थ में। 
नीचे दिए गए शब्दों को वाक्यों में प्रयोग करके देखिए। ध्यान रहे, एक ही शब्द वाक्य में दो बार आना चाहिए और शब्दों के अर्थ में कुछ बदलाव होना चाहिए।
(क) जल      (ख) हार       (ग) फल

बोलचाल में प्रचलित अंग्रेजी शब्द 'फर्स्ट क्लास' में दो शब्द हैं-फर्स्ट और क्लास। यहाँ क्लास का विशेषण है फर्स्ट। चूकि फर्स्ट संख्या है, फर्स्ट क्लास संख्यावाचक विशेषण का उदाहरण है। 'महान आदमी' में किसी आदमी की विशेषता है महान। यह गुणवाचक विशेषण है। संख्यावाचक विशेषण और गुणवाचक विशेषण के उदाहरण खोजकर लिखिए।

लेखक व उसके मित्र कहाँ जा रहे थे? लोगों ने उन्हें शाम वाली बस से न जाने की सलाह क्यों दी?

लेखक को बस वयोवृद्ध क्यों लगी?

बस कंपनी के हिस्सेदार से लेखक ने यह क्यों पूछा कि क्या यह बस चलती है?

लेखक का यह कहना कहाँ तक उचित है कि यह बस गाँधीजी के असहयोग और सविनय अवज्ञा आदोलनों के वक्त अवश्य जवान रही होगी?

हरिशंकर परसाई की रचना ‘बस की यात्रा’ आज के समाज में भी कैसे सार्थक है?