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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 Chapter 18 टोपी
  • NCERT Solution For Class 8 Hindi Vasant Bhag 3

    टोपी Here is the CBSE Hindi Chapter 18 for Class 8 students. Summary and detailed explanation of the lesson, including the definitions of difficult words. All of the exercises and questions and answers from the lesson's back end have been completed. NCERT Solutions for Class 8 Hindi टोपी Chapter 18 NCERT Solutions for Class 8 Hindi टोपी Chapter 18 The following is a summary in Hindi and English for the academic year 2023-24. You can save these solutions to your computer or use the Class 8 Hindi.

    Question 1
    CBSEENHN8001243

    गवरइया और गवरा के बीच किस बात पर बहस हुई और गवरइया को अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर कैसे मिला?

    Solution

    गवरइया व गवरा के बीच आदमी के कपड़े पहनने पर बहस हुई। गवरइया का कहना था कि आदमी कपड़े पहनकर जँचता है जबकि गवरा का कहना था कि आदमी कपड़े पहनकर अपनी कुदरती सुंदरता को ढक लेता है।
    गवरइया की इच्छा थी कि वह अपने सिर पर एक टोपी पहने। उसे अपनी इच्छा पूरी करने का अवसर तब मिला जब उसे कूड़े के ढेर पर चुगते-चुगते रुई का एक फाहा मिला।

    Question 31
    CBSEENHN8001273
    Question 32
    CBSEENHN8001274
    Question 38
    CBSEENHN8001280

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    ”तू समझती नहीं।” गवरा हँसकर बोला, “कपड़े पहन-पहनकर जाड़ा-गरमी-बरसात सहने की उनकी सकत भी जाती रही है। ... और इस कपड़े में बड़ा लफड़ा भी है। कपड़ा पहनते ही पहननेवाले की औकात पता चल जाती हैं ... आदमी-आदमी की हैसियत में भेद पैदा हो जाता है।” 

    क्या गवरा अपने विचार में सही है?
    • गवरा गलत था क्योकि कपड़े पहनना मनुष्य का मात्र शौक है?
    • गवरा पूर्णतया सही है कि कपड़े पहनने से उनकी मौसम को सहने की शक्ति समाप्त होती है और औकात पता चलती है।
    • गवरा गलत है क्योंकि कपड़े पहनने से आदमी सुंदर लगता है।
    • गवरा गलत है क्योंकि कपड़े मनुष्य को पहनने ही चाहिए।

    Easy
    Question 42
    CBSEENHN8001284

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “टोपी तो आदमियों का राजा पहनता है। जानती है, एक टोपी के लिए कितनों का टाट उलट जाता है। जरा-सी चूक हुई नहीं कि टोपी उछलते देर नहीं लगती। अपनी टोपी सलामत रहे, इसी फिकर में कितनों को टोपी पहनानी पड़ती है। ... मेरी मान तो तू इस चक्कर में पड़ ही मत।”

    टोपी के बारे में क्या-क्या कहा गया?
    • टोपी सत्ता का प्रतीक है इससे राजपाट बदल जाते हैं।
    • जरा सी गलती होने पर ये टोपी उछल जाती है अर्थात् बेइज़्ज़ती हो जाती है।
    • टोपी सलामत रहने से परत बनी रहती है और अपनी बात पूरी करने हेतु कितनों को टोपी पहनानी पड़ती है अर्थात् मूर्ख बनाना पड़ता है।
    • दिए गए सभी।

    Easy
    Question 44
    CBSEENHN8001286
    Question 55
    CBSEENHN8001297
    Question 57
    CBSEENHN8001299

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    मुँहमाँगी मजूरी पर कौन मूजी तैयार न होता। ‘कच्च-कच्च’ उसकी कैंची चल उठी और चूहे की तरह ‘सर्र-सर्र’ उसकी सूई कपड़े के भीतर-बाहर होने लगी। बड़े मनोयोग से उसने दो टोपियाँ सिल दीं। खुश होकर दर्जी ने अपनी ओर से एक टोपी पर पाँच फुँदने भी जड़ दिए। फुँदनेवाली टोपी पहनकर तो गवरइया जैसे आपे में न रही। डेढ़ टाँगों पर ही लगी नाचने. फुदक-फुदककर लगी गवरा को दिखाने, “देख मेरी टोपी सबसे निराली ... पाँच फुँदनेवाली।”

    दो टोपियाँ क्यों बनीं?
    • एक गवरइया की, दूसरी दर्जी की मजूरी की।
    • एक गवरइया की, दूसरी राजा के लिए
    • एक गवरइया की, एक गवरे की
    • दोनों गवरइया के लिए।

    Easy
    Question 59
    CBSEENHN8001301

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    मुँहमाँगी मजूरी पर कौन मूजी तैयार न होता। ‘कच्च-कच्च’ उसकी कैंची चल उठी और चूहे की तरह ‘सर्र-सर्र’ उसकी सूई कपड़े के भीतर-बाहर होने लगी। बड़े मनोयोग से उसने दो टोपियाँ सिल दीं। खुश होकर दर्जी ने अपनी ओर से एक टोपी पर पाँच फुँदने भी जड़ दिए। फुँदनेवाली टोपी पहनकर तो गवरइया जैसे आपे में न रही। डेढ़ टाँगों पर ही लगी नाचने. फुदक-फुदककर लगी गवरा को दिखाने, “देख मेरी टोपी सबसे निराली ... पाँच फुँदनेवाली।”

    टोपी पहनकर गवरइया की क्या प्रतिक्रिया थी?
    • वह बहुत प्रसन्न थी, डेढ़ टाँग पर नाचने लगी, गवरइया को दिखाते हुए कह रही थी मेरी टोपी पाँच फुँदनों वाली।
    • वह अपना मुकाबला राजा से करने लगी।
    • वह गवरइया को चिढ़ा रही थी।
    • वह अपनी चाहत के पूरा होने पर स्वयं ही हैरान थी।

    Easy
    Question 60
    CBSEENHN8001302

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक सिपाही ने गुलेल मारकर गवरइया की टोपी नीचे गिरा दी. तो दूसरे सिपाही ने झट वह टोपी लपक ली और राजा के सामने पेश कर दिया। राजा टोपी को पैरों से मसलने ही जा रहा था कि उसकी खूबसूरती देखकर दंग रह गया। कारीगरी के इस नायाब नमूने को देखकर वह जड़ हो गया-”मेरे राज में मेरे सिवा इतनी खूबसूरत टोपी दूसरे के पास कैसे पहुँची!” सोचते हुए राजा उसे उलट-पुलटकर देखने लगा। 

    सिपाही ने गवरइया की टोपी क्यों गिराई?
    • क्योंकि वह टोपी पहनकर राजा को चिढ़ा रही थी।
    • क्योंकि उसकी टोपी राजा की टोपी से सुंदर थी।
    • क्योंकि सिपाही को गवरइया के टोपी पहनने पर हैरानी थी।
    • केवल मन बहलाने हेतु

    Easy
    Question 63
    CBSEENHN8001305

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक सिपाही ने गुलेल मारकर गवरइया की टोपी नीचे गिरा दी. तो दूसरे सिपाही ने झट वह टोपी लपक ली और राजा के सामने पेश कर दिया। राजा टोपी को पैरों से मसलने ही जा रहा था कि उसकी खूबसूरती देखकर दंग रह गया। कारीगरी के इस नायाब नमूने को देखकर वह जड़ हो गया-”मेरे राज में मेरे सिवा इतनी खूबसूरत टोपी दूसरे के पास कैसे पहुँची!” सोचते हुए राजा उसे उलट-पुलटकर देखने लगा। 

    राजा ने टोपी देखकर क्या कहा?
    • यह टोपी मेरे कक्ष में रख दो।
    • गवरइया से टोपी छीन लो।
    • मेरे राज्य में मेरे सिवा इतनी खूबसूरत टोपी दूसरे के पास कैसे पहुँची।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 65
    CBSEENHN8001307

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “इस गवरइया ने जो भी काम करवाया उसमें आधा हिस्सा दे देती थी। जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता। इसके पास कुछ भी नहीं था फिर भी यह आधा दे देती थी। इसीलिए इसके काम में अपने-आप नफासत आती गई. सरकार।” धुनिया दंडवत पर दंडवत किए जा रहा था।
    “देख ले-देख ले, राजा! ... आँख में अँगुली डालकर देख ले। इसके लिए पूरे मोल चुकाए हैं। बेगार की नहीं है यह।”  गवरइया फिर चिल्लाने लगी. ‘‘यह राजा तो कंगाल है। निरा कंगाल। इसका धन घट गया लगता है। इसे टोपी तक नहीं जुरती ... तभी तो इसने मेरी टोपी छीन ली।”

    धुनिया ने राजा को गवरइया की मजूरी के बारे में क्या बताया?

    • गवरइया ने मुँहमाँगी मजूरी दी।
    • गवरइया ने पाँच आने दिए।
    • गवरइया ने आधी रूई मजूरी में दी।
    • गवरइया ने प्रेम से काम करवाया था।

    Easy
    Question 66
    CBSEENHN8001308

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “इस गवरइया ने जो भी काम करवाया उसमें आधा हिस्सा दे देती थी। जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता। इसके पास कुछ भी नहीं था फिर भी यह आधा दे देती थी। इसीलिए इसके काम में अपने-आप नफासत आती गई. सरकार।” धुनिया दंडवत पर दंडवत किए जा रहा था।
    “देख ले-देख ले, राजा! ... आँख में अँगुली डालकर देख ले। इसके लिए पूरे मोल चुकाए हैं। बेगार की नहीं है यह।”  गवरइया फिर चिल्लाने लगी. ‘‘यह राजा तो कंगाल है। निरा कंगाल। इसका धन घट गया लगता है। इसे टोपी तक नहीं जुरती ... तभी तो इसने मेरी टोपी छीन ली।”

    ‘जिसके पास बहुत कुछ है वह कुछ नहीं देता’-ऐसा धुनिया ने क्यों कहा?

    • क्योंकि राजा काम करवाने की मजूरी नहीं देता था।
    • क्योंकि राजा कम मजूरी देता था।
    • क्योंकि राजा प्रेम से काम नहीं करवाता था।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 67
    CBSEENHN8001309

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “इस गवरइया ने जो भी काम करवाया उसमें आधा हिस्सा दे देती थी। जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता। इसके पास कुछ भी नहीं था फिर भी यह आधा दे देती थी। इसीलिए इसके काम में अपने-आप नफासत आती गई. सरकार।” धुनिया दंडवत पर दंडवत किए जा रहा था।
    “देख ले-देख ले, राजा! ... आँख में अँगुली डालकर देख ले। इसके लिए पूरे मोल चुकाए हैं। बेगार की नहीं है यह।”  गवरइया फिर चिल्लाने लगी. ‘‘यह राजा तो कंगाल है। निरा कंगाल। इसका धन घट गया लगता है। इसे टोपी तक नहीं जुरती ... तभी तो इसने मेरी टोपी छीन ली।”

    धुनिया  बार-बार दडंवत क्यों कर रहा था?
    • उसे डर था कि राजा उससे सदा मुमुफ्ताम न करवाए।
    • उसे डर था कि उसे देश निकाला न दे दिया जाए।
    • उसे डर था कि राजा उसे दंडित न करे।
    • उसे डर था कि कही उसे अपना काम ही बंद न करना पड़े

    Easy
    Question 68
    CBSEENHN8001310

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “इस गवरइया ने जो भी काम करवाया उसमें आधा हिस्सा दे देती थी। जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता। इसके पास कुछ भी नहीं था फिर भी यह आधा दे देती थी। इसीलिए इसके काम में अपने-आप नफासत आती गई. सरकार।” धुनिया दंडवत पर दंडवत किए जा रहा था।
    “देख ले-देख ले, राजा! ... आँख में अँगुली डालकर देख ले। इसके लिए पूरे मोल चुकाए हैं। बेगार की नहीं है यह।”  गवरइया फिर चिल्लाने लगी. ‘‘यह राजा तो कंगाल है। निरा कंगाल। इसका धन घट गया लगता है। इसे टोपी तक नहीं जुरती ... तभी तो इसने मेरी टोपी छीन ली।”

    गवरइया ने राजा को क्या उलाहना दिया?
    • गवरइया ने राजा को कहा कि मजूरी देना सीखे।
    • गवरइया ने कहा कि मैं तुम्हारी तरह कोई काम बेगार में नहीं करवाती।
    • गवरइया ने कहा राजा कंजूस है।
    • कि राजा से एक टोपी तक नहीं बनवाई जाती इसीलिए तो मेरी टोपी छीन ली। यह राजा तो कंगाल है।

    Easy
    Question 69
    CBSEENHN8001311

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    “इस गवरइया ने जो भी काम करवाया उसमें आधा हिस्सा दे देती थी। जिसके पास बहुत कुछ है, वह कुछ भी नहीं देता। इसके पास कुछ भी नहीं था फिर भी यह आधा दे देती थी। इसीलिए इसके काम में अपने-आप नफासत आती गई. सरकार।” धुनिया दंडवत पर दंडवत किए जा रहा था।
    “देख ले-देख ले, राजा! ... आँख में अँगुली डालकर देख ले। इसके लिए पूरे मोल चुकाए हैं। बेगार की नहीं है यह।”  गवरइया फिर चिल्लाने लगी. ‘‘यह राजा तो कंगाल है। निरा कंगाल। इसका धन घट गया लगता है। इसे टोपी तक नहीं जुरती ... तभी तो इसने मेरी टोपी छीन ली।”

    गवरया और धुनिया राजा को क्या अहसास दिलाना चाहते थे।
    • कि राजा कंजूस न बने।
    • कि राजा को सभी काम करने वालों को मजूरी देनी चाहिए।
    • कि राजा को दूसरों की अंहमियत समझनी चाहिए।
    • कि राजा को बजाय मुफ्त में काम करवाने के लोगों की सहायता करनी चाहिए।

    Easy
    Question 71
    CBSEENHN8001313

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    'राजा ताे वाकई अकबका गया था। एक तो तमाम कारीगरों ने उसकी मदद की थी। दूसरे, इस टोपी के सामने अपनी टोपी की कमसूरती। तीसरे, खजाने की खुलती पोल। इस पाखी को कैसे पता चला कि धन घट गया है? तमाम बेगार करवाने, बहुत सख्ती से लगान वसूलने के बावजूद राजा का खजाना खाली ही रहता था। इतना ऐशोआसम, इतनी लशकरी, इतने लवाजिमे का बोझ खजाना संभाले भी तो कैसे!'

    राजा क्यों अकबका गया?
    • गवरइया ने कैसे कह दिया कि धन घट रहा है।
    • गवरइया की मुझे कंजूस कहने की हिम्मत कैसे हुई?
    • गवरइया ने सभी कारीगरों को अपने हक में कैसे कर लिया।
    • सभी कारीगर गवरइया से खुश कैसे हैं और गवरइया को कैसे पता चला कि स्राज्या धन बट रहा है।

    Easy
    Question 72
    CBSEENHN8001314

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    'राजा ताे वाकई अकबका गया था। एक तो तमाम कारीगरों ने उसकी मदद की थी। दूसरे, इस टोपी के सामने अपनी टोपी की कमसूरती। तीसरे, खजाने की खुलती पोल। इस पाखी को कैसे पता चला कि धन घट गया है? तमाम बेगार करवाने, बहुत सख्ती से लगान वसूलने के बावजूद राजा का खजाना खाली ही रहता था। इतना ऐशोआसम, इतनी लशकरी, इतने लवाजिमे का बोझ खजाना संभाले भी तो कैसे!'

    राजा अदंर ही अदंर क्यों परेशान था?
    • क्योंकि मुफ्त में काम करवाने व सख्ती से कर वसूलने पर भी खजाना खाली था।
    • एक गवरइया द्वारा अपनी बेइज्जती होने पर।
    • अपनी टोपी सुंदर न होने पर।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 73
    CBSEENHN8001315

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    'राजा ताे वाकई अकबका गया था। एक तो तमाम कारीगरों ने उसकी मदद की थी। दूसरे, इस टोपी के सामने अपनी टोपी की कमसूरती। तीसरे, खजाने की खुलती पोल। इस पाखी को कैसे पता चला कि धन घट गया है? तमाम बेगार करवाने, बहुत सख्ती से लगान वसूलने के बावजूद राजा का खजाना खाली ही रहता था। इतना ऐशोआसम, इतनी लशकरी, इतने लवाजिमे का बोझ खजाना संभाले भी तो कैसे!'

    उसे किस बात की चिंता थी?
    • अपना प्रभुत्व कैसे कायम करेगा?
    • गवरइया को नीचा कैसे दिखाएगा?
    • इतने ऐशोआराम, इतनी लश्करी, इतने लवाज़िमे का बोझ खजाना कैसे संभालेगा?
    • अब मुफ़्त में काम कैसे करवाएगा?

    Easy
    Question 74
    CBSEENHN8001316

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    'राजा ताे वाकई अकबका गया था। एक तो तमाम कारीगरों ने उसकी मदद की थी। दूसरे, इस टोपी के सामने अपनी टोपी की कमसूरती। तीसरे, खजाने की खुलती पोल। इस पाखी को कैसे पता चला कि धन घट गया है? तमाम बेगार करवाने, बहुत सख्ती से लगान वसूलने के बावजूद राजा का खजाना खाली ही रहता था। इतना ऐशोआसम, इतनी लशकरी, इतने लवाजिमे का बोझ खजाना संभाले भी तो कैसे!'

    राजा की हालत कैसी हो गई?
    • राजा की हालत ‘काटी तो खून नहीं’ वाली हो गई।
    • राजा की परेशानी का अंत न था।
    • राजा इतना निढाल हो गया कि कुछ बोल ही न पाया।
    • अपने सिपाहियों के समक्ष शर्मिंदा हो गया।

    Easy