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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 Chapter 14 अकबरी लोटा
  • NCERT Solution For Class 8 Hindi Vasant Bhag 3

    अकबरी लोटा Here is the CBSE Hindi Chapter 14 for Class 8 students. Summary and detailed explanation of the lesson, including the definitions of difficult words. All of the exercises and questions and answers from the lesson's back end have been completed. NCERT Solutions for Class 8 Hindi अकबरी लोटा Chapter 14 NCERT Solutions for Class 8 Hindi अकबरी लोटा Chapter 14 The following is a summary in Hindi and English for the academic year 2024-25. You can save these solutions to your computer or use the Class 8 Hindi.

    Question 1
    CBSEENHN8000951

    “लाला ने लोटा ले लिया, बोले कुछ नहीं, अपनी पत्नी का अदब मानते थे।”
    लाला झाऊलाल को बेढंगा लोटा बिलकुल पसंद नहीं था। फिर भी उन्होंने चुपचाप लोटा ले लिया। आपके विचार से वे चुप क्यों रहे? अपने विचार लिखिए।

    Solution
    लाला झाऊलाल छत पर टहल रहे थे। कुछ प्यास लगने पर उन्होंने नौकर को पानी के लिए आवाज़ दी। नौकर के न होने पर उनकी पत्नी उनके लिए स्वयं पानी लेकर आई। वह पानी एक बेढंगे से लोटे में लाई जो लाला को जरा भी पसंद न था लेकिन उन्होंने अपनी पत्नी को कुछ न कहा क्योंकि वे अपनी पत्नी की इज़्ज़त करते थे बिना वजह उसे टोकना नहीं चाहते थे। दूसरा वे पत्नी के तेज़-तर्रार स्वभाव को भी जानते थे वे सोचने लगे कि यदि मैंने लोटे के बारे में कुछ कह दिया तो खाना बाल्टी में ही खाना पड़ेगा। इसलिए वे चुप रहे।
    Question 32
    CBSEENHN8000982

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    पत्नी ने एक दिन एकाएक ढाई सौ रुपये की माँग पेश की, तब उनका जी एक बार ज़ोर से सनसनाया और फिर बैठ गया। उनकी यह दशा देखकर पत्नी ने कहा-”डरिए मत, आप देने में असमर्थ हों तो मैं अपनै भाई से माँग लूँ?”
    लाला झाऊलाल तिलमिला उठे। उन्होंने रोब के साथ कहा-”अजी हटो, ढाई सौ रुपये के लिए भाई से भीख माँगोगी, मुझसे ले लेना।”

    पत्नी ने माँग के साथ ही क्या तर्क दिया?
    • यदि आप देने में असमर्थ हैं तो मत दीजिए।
    • यदि आप देने में असमर्थ हैं तो मैं अपने भाई से माँग लूँ।
    • यदि आप देने में असमर्थ हैं तो पिताजी से ले लूँ।
    • यदि आप अब देने में असमर्थ हैं तो अगले सप्ताह दे देना।

    Easy
    Question 35
    CBSEENHN8000985

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    जब चार दिन ज्यों-त्यों में यों ही बीत गए और रुपयों का कोई प्रबंध न हो सका तब उन्हें चिंता होने लगी। प्रश्न अपनी प्रतिष्ठा का था, अपने ही घर में अपनी साख का था। देने का पक्का वादा करके अगर अब दे न सके तो अपने मन में वह क्या सोचेगी? उसकी नज़रों में उसका क्या मूल्य रह जाएगा? अपनी वाहवाही की सैकड़ों गाथाएँ सुना चुके थे। अब जो एक काम पड़ा तो चारों खाने चित हो रहे। यह पहली बार उसने मुँह खोलकर कुछ रुपयों का सवाल किया था। इस समय अगर दुम दबाकर निकल भागते हैं तो फिर उसे क्या मुँह दिखलाएँगे? 

    झाऊलाल की चिंता का क्या कारण था?
    • पत्नी से हरदम झगड़ा करना
    • पैसों का इंतजाम न हो पाना
    • पत्नी के समक्ष सर झुकना
    • पत्नी का भाई से रुपए माँगना

    Easy
    Question 36
    CBSEENHN8000986

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    जब चार दिन ज्यों-त्यों में यों ही बीत गए और रुपयों का कोई प्रबंध न हो सका तब उन्हें चिंता होने लगी। प्रश्न अपनी प्रतिष्ठा का था, अपने ही घर में अपनी साख का था। देने का पक्का वादा करके अगर अब दे न सके तो अपने मन में वह क्या सोचेगी? उसकी नज़रों में उसका क्या मूल्य रह जाएगा? अपनी वाहवाही की सैकड़ों गाथाएँ सुना चुके थे। अब जो एक काम पड़ा तो चारों खाने चित हो रहे। यह पहली बार उसने मुँह खोलकर कुछ रुपयों का सवाल किया था। इस समय अगर दुम दबाकर निकल भागते हैं तो फिर उसे क्या मुँह दिखलाएँगे? 

    वे मन ही मन क्या सोच रहे थे?
    • पैसों का इंतजाम न होने पर वे पत्नी की नजरों में गिर जाएँगे।
    • वे पत्नी को क्या जवाब देंगे।
    • अपनी पत्नी के भाई से नजरें कैसे मिलाएँगे।
    • पत्नी पर रोब कैसे जतलाएँगे।

    Easy
    Question 37
    CBSEENHN8000987

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    जब चार दिन ज्यों-त्यों में यों ही बीत गए और रुपयों का कोई प्रबंध न हो सका तब उन्हें चिंता होने लगी। प्रश्न अपनी प्रतिष्ठा का था, अपने ही घर में अपनी साख का था। देने का पक्का वादा करके अगर अब दे न सके तो अपने मन में वह क्या सोचेगी? उसकी नज़रों में उसका क्या मूल्य रह जाएगा? अपनी वाहवाही की सैकड़ों गाथाएँ सुना चुके थे। अब जो एक काम पड़ा तो चारों खाने चित हो रहे। यह पहली बार उसने मुँह खोलकर कुछ रुपयों का सवाल किया था। इस समय अगर दुम दबाकर निकल भागते हैं तो फिर उसे क्या मुँह दिखलाएँगे? 

    लाला को क्या डर था?
    • उनकी पत्नी अपने भाई से रुपए माँग लेगी
    • रुपए न दे पाने पर पत्नी का सामना कैसे करेंगे?
    • पत्नी द्वारा ताने सुनाए जाने का
    • दिए गए सभी।

    Easy
    Question 38
    CBSEENHN8000988

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    जब चार दिन ज्यों-त्यों में यों ही बीत गए और रुपयों का कोई प्रबंध न हो सका तब उन्हें चिंता होने लगी। प्रश्न अपनी प्रतिष्ठा का था, अपने ही घर में अपनी साख का था। देने का पक्का वादा करके अगर अब दे न सके तो अपने मन में वह क्या सोचेगी? उसकी नज़रों में उसका क्या मूल्य रह जाएगा? अपनी वाहवाही की सैकड़ों गाथाएँ सुना चुके थे। अब जो एक काम पड़ा तो चारों खाने चित हो रहे। यह पहली बार उसने मुँह खोलकर कुछ रुपयों का सवाल किया था। इस समय अगर दुम दबाकर निकल भागते हैं तो फिर उसे क्या मुँह दिखलाएँगे? 

    लाला के समक्ष कैसा प्रश्न था?
    • उनकी प्रतिष्ठा व घर में साख का
    • पत्नी पर रोब डालने का
    • पत्नी को रुपए देने का
    • पत्नी के समक्ष न झुकने का

    Easy
    Question 39
    CBSEENHN8000989

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    जब चार दिन ज्यों-त्यों में यों ही बीत गए और रुपयों का कोई प्रबंध न हो सका तब उन्हें चिंता होने लगी। प्रश्न अपनी प्रतिष्ठा का था, अपने ही घर में अपनी साख का था। देने का पक्का वादा करके अगर अब दे न सके तो अपने मन में वह क्या सोचेगी? उसकी नज़रों में उसका क्या मूल्य रह जाएगा? अपनी वाहवाही की सैकड़ों गाथाएँ सुना चुके थे। अब जो एक काम पड़ा तो चारों खाने चित हो रहे। यह पहली बार उसने मुँह खोलकर कुछ रुपयों का सवाल किया था। इस समय अगर दुम दबाकर निकल भागते हैं तो फिर उसे क्या मुँह दिखलाएँगे? 

    पत्नी ने पहली बार कितने माँगे थे?
    • पांच सौ 
    • ढाई सौ
    • दो सौ
    • चार सौ

    Easy
    Question 59
    CBSEENHN8001009

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    पं. बिलवासी मिश्र भीड़ को चीरते हुए आँगन में आते दिखाई पड़े उन्होंने आते ही पहला काम यह किया कि उस अंग्रेज़ को छोड़कर और जितने आदमी में आँगन घुस आए थे, सबको बाहर निकाल दिया। फिर आँगन में कुर्सी रखकर उन्होंने साहब से कहा-”आपके पैर में शायद कुछ चोट आ गई है। अब आप आराम से कुर्सी पर बैठ जाइए।”

    झगड़ते हुए अंग्रेज़ का विरोध करने की बजाय वे उसका साथ क्यों दे रहे थे?

    • वे उसे शांत करके झाऊलाल की जान बचाना चाहते थे।
    • वे उसे शांत करना चाहते थे और लोटे का कुछ कमाल दिखाना चाहते थे।
    • वे अंग्रेज़ को पुलिस स्टेशन ले जाकर मामला सुलझाना चाहते थे।
    • वे चाहते थे कि अंग्रेज़ से किसी प्रकार ढाई सौ रुपए ले लिए जाए ताकि झाऊलाल की समस्या टल जाए।

    Easy
    Question 65
    CBSEENHN8001015

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    पंडित जी ने लोटे की क्या कथा बताई?
    • बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर रेगिस्तान में घूम रहा था तो एक ब्राह्मण ने उसे इस लोटे से पानी पिलाया।
    • बादशाह हुमायूँ के पिता की निशानी है यह लौटा।
    • बादशाह हुमायूं ने सौ सोने के लोटों के बदले एक यह लोटा लिया।
    • बादशाह हुमायूँ इसी लोटे से पानी पीते थे।

    Easy
    Question 66
    CBSEENHN8001016

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    ब्राह्मण को लोटे के बदले क्या मिला?
    • दस सोने के लोटे
    • पाँच सोने के लोटे
    • सौ सोने के लोटे 
    • पचास सोने के लोटे

    Easy
    Question 67
    CBSEENHN8001017

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    ब्राह्मण को लोटे के बदले क्या मिला?
    • दस सोने के लोटे 
    • पाँच सोने के लोटे
    • सौ सोने के लोटे
    • पचास सोने के लोटे

    Easy
    Question 68
    CBSEENHN8001018

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    ‘वजू’ शब्द से आप क्या समझते हैं?
    • नमाज पढ़ने से पहले पानी पीने हेतु की गई प्रक्रिया
    • नमाज पड़ने से पूर्व हाथ-पैर धोने की प्रक्रिया
    • नमाज़ पड़ते समय पानी भर कर रखने की प्रक्रिया 
    • इनमें से कोई नहीं

    Easy
    Question 69
    CBSEENHN8001019

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    ‘म्यूज़ियम’ के साथ लोटे को क्यों जोड़ा गया?
    • उसे अच्छे दामों में बेचने के लिए।
    • झाऊलाला की समस्या का निदान करने हेतु।
    • अंग्रेज़ पुरानी चीजें खरीदने का शौकीन था इसलिए म्यूज़ियम के साथ लोटे का संबंध जोड़कर उसकी महत्ता बढ़ाई गई।
    • दिए गए सभी।

    Easy
    Question 70
    CBSEENHN8001020

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सोलहवीं शताब्दी की बात है। बादशाह हुमायूँ शेरशाह से हारकर भागा था और सिंध के रेगिस्तान मैं मारा-मारा फिर रहा था। एक अवसर पर प्यास से उसकी जान निकल रही थी। उस समय एक ब्राह्मण ने इसी लोटा से पानी पिलाकर उसकी जान बचाई थी। हुमायूँ के बाद अकबर ने उस ब्राह्मण का पता लगाकर उससे इस लोटे को ले लिया और इसके बदले में उसे इसी प्रकार के दस सोने के लोटे प्रदान किए। यह लोटा सम्राट अकबर को बहुत प्यारा था। इसी से इसका नाम अकबरी लोटा पड़ा। वह बराबर इसी से वजू करता था।

    किस सम्राट के नाम से इस लोटे का नामकरण हुआ?
    • हुमायूँ 
    • जहाँगीर
    • अकबर
    • शेरशाह

    Easy
    Question 71
    CBSEENHN8001021

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक कबूतर ने नूरजहाँ से जहाँगीर का प्रेम कराया था। जहाँगीर के पूछने पर कि, मेरा एक कबूतर तुमने कैसे उड़ जाने दिया, नूरजहाँ ने उसके दूसरे कबूतर को उड़ाकर बताया था, कि ऐसे। उसके इस भोलेपन पर जहाँगीर दिलोजान से निछावर हो गया। उसी क्षण से उसने अपने को नूरजहाँ के हाथ कर दिया। कबूतर का यह अहसान वह नहीं भूला। उसके एक अंडे को बड़े जतन से रख छोड़ा। एक बिल्लोर की हाँडी में वह उसके सामने टँगा रहता था। बाद में वही अंडा “जहाँगीरी अंडा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    नूरजहाँ का जहाँगीर से प्रेम किसने करवाया?
    • एक कबूतर ने
    • एक सेनापति ने
    • उन्होंने स्वयं ही एक-दूसरे को पसंद किया
    • नूरजहाँ की सखी ने

    Easy
    Question 72
    CBSEENHN8001022

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक कबूतर ने नूरजहाँ से जहाँगीर का प्रेम कराया था। जहाँगीर के पूछने पर कि, मेरा एक कबूतर तुमने कैसे उड़ जाने दिया, नूरजहाँ ने उसके दूसरे कबूतर को उड़ाकर बताया था, कि ऐसे। उसके इस भोलेपन पर जहाँगीर दिलोजान से निछावर हो गया। उसी क्षण से उसने अपने को नूरजहाँ के हाथ कर दिया। कबूतर का यह अहसान वह नहीं भूला। उसके एक अंडे को बड़े जतन से रख छोड़ा। एक बिल्लोर की हाँडी में वह उसके सामने टँगा रहता था। बाद में वही अंडा “जहाँगीरी अंडा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    नूरजहाँ ने एक कबूतर कैसे उड़ाया यह उसने जहाँगीर को कैसे बताया?
    • कबूतर को वापिस बुलाकर
    • दूसरे कबूतर को उड़ाकर
    • उड़ते कबूतर की ओर इशारा करके
    • सांकेतिक भाषा में

    Easy
    Question 73
    CBSEENHN8001023

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक कबूतर ने नूरजहाँ से जहाँगीर का प्रेम कराया था। जहाँगीर के पूछने पर कि, मेरा एक कबूतर तुमने कैसे उड़ जाने दिया, नूरजहाँ ने उसके दूसरे कबूतर को उड़ाकर बताया था, कि ऐसे। उसके इस भोलेपन पर जहाँगीर दिलोजान से निछावर हो गया। उसी क्षण से उसने अपने को नूरजहाँ के हाथ कर दिया। कबूतर का यह अहसान वह नहीं भूला। उसके एक अंडे को बड़े जतन से रख छोड़ा। एक बिल्लोर की हाँडी में वह उसके सामने टँगा रहता था। बाद में वही अंडा “जहाँगीरी अंडा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    जहाँगीर ने एक अंडे को संभाल कर क्यों रखा?
    • क्योंकि यह उस कबूतर का अंडा था जिसके कारण जहाँगीर ने स्वयं काे नूरजहाँ के समक्ष समर्पित किया था।
    • क्योंकि यह अंडा विशेष कबूतर का था।
    • क्योंकि यह उनके अब्बाजान की निशानी था।
    • क्योंकि यह नूरजहाँ ने जहाँगीर को दिया था।

    Easy
    Question 74
    CBSEENHN8001024

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक कबूतर ने नूरजहाँ से जहाँगीर का प्रेम कराया था। जहाँगीर के पूछने पर कि, मेरा एक कबूतर तुमने कैसे उड़ जाने दिया, नूरजहाँ ने उसके दूसरे कबूतर को उड़ाकर बताया था, कि ऐसे। उसके इस भोलेपन पर जहाँगीर दिलोजान से निछावर हो गया। उसी क्षण से उसने अपने को नूरजहाँ के हाथ कर दिया। कबूतर का यह अहसान वह नहीं भूला। उसके एक अंडे को बड़े जतन से रख छोड़ा। एक बिल्लोर की हाँडी में वह उसके सामने टँगा रहता था। बाद में वही अंडा “जहाँगीरी अंडा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    अंडे का नाम ‘जहाँगीरी अंडा’ क्यों पड़ा?
    • क्योंकि जहाँगीर ने उसे अपने पास सहेज कर रखा।
    • क्योकि यह अंडा नूरजहाँ ने जहाँगीर को उपहार स्वरूप दिया था।
    • क्योंकि यह अंडा जहाँगीर के दरबार में था।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 75
    CBSEENHN8001025

    निम्न गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    एक कबूतर ने नूरजहाँ से जहाँगीर का प्रेम कराया था। जहाँगीर के पूछने पर कि, मेरा एक कबूतर तुमने कैसे उड़ जाने दिया, नूरजहाँ ने उसके दूसरे कबूतर को उड़ाकर बताया था, कि ऐसे। उसके इस भोलेपन पर जहाँगीर दिलोजान से निछावर हो गया। उसी क्षण से उसने अपने को नूरजहाँ के हाथ कर दिया। कबूतर का यह अहसान वह नहीं भूला। उसके एक अंडे को बड़े जतन से रख छोड़ा। एक बिल्लोर की हाँडी में वह उसके सामने टँगा रहता था। बाद में वही अंडा “जहाँगीरी अंडा” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    कबूतर के अंडे को किसमें सहेज कर रखा गया?
    • एक घोंसले में
    • ‘बिल्लोर की हांडी’ में
    • तश्तरी में
    • छोटी सी झोपड़ी में रूई के बिछौने पर

    Easy