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NCERT Solutions for Class 8 Hindi Vasant Bhag 3 Chapter 10 कामचोर
  • NCERT Solution For Class 8 Hindi Vasant Bhag 3

    कामचोर Here is the CBSE Hindi Chapter 10 for Class 8 students. Summary and detailed explanation of the lesson, including the definitions of difficult words. All of the exercises and questions and answers from the lesson's back end have been completed. NCERT Solutions for Class 8 Hindi कामचोर Chapter 10 NCERT Solutions for Class 8 Hindi कामचोर Chapter 10 The following is a summary in Hindi and English for the academic year 2024-25. You can save these solutions to your computer or use the Class 8 Hindi.

    Question 1
    CBSEENHN8001125

    कहानी में 'मोटे-मोटे किस काम के हैं?' किन के बारे में और क्यों कहा गया? 

    Solution
    कहानी में ‘मोटे-मोटे किस काम के’ घर के बच्चों के लिए कहा गया है क्योंकि उनके माता-पिता काे लगता है कि वे केवल नौकरों पर हुक्म चलाते हैं और खा-पीकर आराम करते हैं। घर का कोई काम नहीं करते।
    Question 24
    CBSEENHN8001148
    Question 25
    CBSEENHN8001149

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बड़ी देर के बाद-विवाद के वाद यह तय हुआ कि सचमुच नौकरों को निकाल दिया जाए। आखिर, ये मोटे-मोटे किस काम के हैं! हिलकर पानी नहीं पीते। इन्हें अपना काम खुद करने की आदत होनी चाहिए। कामचोर कहीं के!
    “तुम लोग कुछ नहीं। इतने सारे हो और सारा दिन ऊधम मचाने के सिवा कुछ नहीं करते।”
    और सचमुच हमें खयाल आया कि हम आखिर काम क्यों नहीं करते? हिलकर पानी पीने में अपना क्या खर्च होता है? इसलिए हमने तुरंत हिल-हिलाकर पानी पीना शुरू किया।

    परिवार में क्या तय किया गया?
    • बच्चों को नौकर बनाया जाए।
    • घर के सभी काम बच्चे करें।
    • नौकरों को निकाल दिया जाए।
    • बच्चे समय व्यर्थ न करें।

    Easy
    Question 26
    CBSEENHN8001150

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बड़ी देर के बाद-विवाद के वाद यह तय हुआ कि सचमुच नौकरों को निकाल दिया जाए। आखिर, ये मोटे-मोटे किस काम के हैं! हिलकर पानी नहीं पीते। इन्हें अपना काम खुद करने की आदत होनी चाहिए। कामचोर कहीं के!
    “तुम लोग कुछ नहीं। इतने सारे हो और सारा दिन ऊधम मचाने के सिवा कुछ नहीं करते।”
    और सचमुच हमें खयाल आया कि हम आखिर काम क्यों नहीं करते? हिलकर पानी पीने में अपना क्या खर्च होता है? इसलिए हमने तुरंत हिल-हिलाकर पानी पीना शुरू किया।

    ‘मोटे-मोटे’ शब्द किनके लिए प्रयुक्त हुआ है?
    • नौकरों के लिए
    • भेड़ों के लिए
    • बच्चों के लिए
    • काम न करने वालों के लिए।

    Easy
    Question 28
    CBSEENHN8001152

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    बड़ी देर के बाद-विवाद के वाद यह तय हुआ कि सचमुच नौकरों को निकाल दिया जाए। आखिर, ये मोटे-मोटे किस काम के हैं! हिलकर पानी नहीं पीते। इन्हें अपना काम खुद करने की आदत होनी चाहिए। कामचोर कहीं के!
    “तुम लोग कुछ नहीं। इतने सारे हो और सारा दिन ऊधम मचाने के सिवा कुछ नहीं करते।”
    और सचमुच हमें खयाल आया कि हम आखिर काम क्यों नहीं करते? हिलकर पानी पीने में अपना क्या खर्च होता है? इसलिए हमने तुरंत हिल-हिलाकर पानी पीना शुरू किया।

     बच्चों ने क्या निर्णय लिया?

    • किसी को कोई काम न करने देंगे
    • वे घर से भाग जाएँगे
    • कुछ काम करेंगे
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 29
    CBSEENHN8001153

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सारा घर धूल से अट गया। खाँसते-खाँसते सब बेदम हो गए। सारी धूल जो दरी पर थी, जो फर्श पर थी, सबके सिरों पर जम गई। नाकों ओर आँखों में घुस गई। बुरा हाल हो गया सबका। हम लोगों को तुरंत आँगन में निकाला गया। वहाँ हम लोगों ने फौरन झाड़ू देने का फैसला किया।
    झाड़ू क्योंकि एक थी और तनख्वाह लेनेवाले उम्मीदवार बहुत, इसलिए क्षण-भर में बाबू झाड़ू के पुर्जे उड़ गए। जितनी सींके जिसके हाथ पड़ी. वह उनसे ही उलटे-सीधे हाथ मारने लगा। अम्मा ने सिर पीट लिया। भई, ये बुजुर्ग काम करने दें तो इंसान काम करे। जब झरा-जरा सी बात पर टोकने लगे तो बस, हो चुका काम। 

    बच्चे कौन-सा काम कर रहे थे?

    • मुर्गियों को दबड़े तक पहुँचा रहे थे 
    • भेड़ों को दाना खिला रहे थे
    • फर्शी दरी साफ कर रहे थे 
    • आँगन झाडू लगा रहे थे

    Easy
    Question 30
    CBSEENHN8001154

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सारा घर धूल से अट गया। खाँसते-खाँसते सब बेदम हो गए। सारी धूल जो दरी पर थी, जो फर्श पर थी, सबके सिरों पर जम गई। नाकों ओर आँखों में घुस गई। बुरा हाल हो गया सबका। हम लोगों को तुरंत आँगन में निकाला गया। वहाँ हम लोगों ने फौरन झाड़ू देने का फैसला किया।
    झाड़ू क्योंकि एक थी और तनख्वाह लेनेवाले उम्मीदवार बहुत, इसलिए क्षण-भर में बाबू झाड़ू के पुर्जे उड़ गए। जितनी सींके जिसके हाथ पड़ी. वह उनसे ही उलटे-सीधे हाथ मारने लगा। अम्मा ने सिर पीट लिया। भई, ये बुजुर्ग काम करने दें तो इंसान काम करे। जब झरा-जरा सी बात पर टोकने लगे तो बस, हो चुका काम। 

    सारा घर धूल से क्यों अट गया?

    • भेड़ों के इधर-उधर भागने से 
    • फर्शी दरी की धूल उड़ने से
    • घर के सामान की झाडू-पोंछ करने से
    • आंगन में जोर से झाडू लगाने पर

    Easy
    Question 31
    CBSEENHN8001155

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सारा घर धूल से अट गया। खाँसते-खाँसते सब बेदम हो गए। सारी धूल जो दरी पर थी, जो फर्श पर थी, सबके सिरों पर जम गई। नाकों ओर आँखों में घुस गई। बुरा हाल हो गया सबका। हम लोगों को तुरंत आँगन में निकाला गया। वहाँ हम लोगों ने फौरन झाड़ू देने का फैसला किया।
    झाड़ू क्योंकि एक थी और तनख्वाह लेनेवाले उम्मीदवार बहुत, इसलिए क्षण-भर में बाबू झाड़ू के पुर्जे उड़ गए। जितनी सींके जिसके हाथ पड़ी. वह उनसे ही उलटे-सीधे हाथ मारने लगा। अम्मा ने सिर पीट लिया। भई, ये बुजुर्ग काम करने दें तो इंसान काम करे। जब झरा-जरा सी बात पर टोकने लगे तो बस, हो चुका काम। 

    धूल उड़ने से क्या हुआ?


    • सब चिल्लाने लगे।
    • सब कुछ दिखाई देना बंद हो गया।
    • सबका सांस लेना कठिन हो गया। सबके सिरों पर धूल जम गई, नाक व आँखों में घुस गई।
    • सभी बच्चों को डाँटने लगे।

    Easy
    Question 32
    CBSEENHN8001156

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सारा घर धूल से अट गया। खाँसते-खाँसते सब बेदम हो गए। सारी धूल जो दरी पर थी, जो फर्श पर थी, सबके सिरों पर जम गई। नाकों ओर आँखों में घुस गई। बुरा हाल हो गया सबका। हम लोगों को तुरंत आँगन में निकाला गया। वहाँ हम लोगों ने फौरन झाड़ू देने का फैसला किया।
    झाड़ू क्योंकि एक थी और तनख्वाह लेनेवाले उम्मीदवार बहुत, इसलिए क्षण-भर में बाबू झाड़ू के पुर्जे उड़ गए। जितनी सींके जिसके हाथ पड़ी. वह उनसे ही उलटे-सीधे हाथ मारने लगा। अम्मा ने सिर पीट लिया। भई, ये बुजुर्ग काम करने दें तो इंसान काम करे। जब झरा-जरा सी बात पर टोकने लगे तो बस, हो चुका काम। 

    ‘झाड़ू पुर्जे उड़ गए’-ऐसा क्यों कहा गया?

    • बच्चों ने झाड़ू एक दूसरे से खींच-खींचकर तिनका-तिनका कर डाला।
    • झाड़ू तिनके हवा में उड़ गए।
    • झाडू टूट गया।
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 33
    CBSEENHN8001157

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    सारा घर धूल से अट गया। खाँसते-खाँसते सब बेदम हो गए। सारी धूल जो दरी पर थी, जो फर्श पर थी, सबके सिरों पर जम गई। नाकों ओर आँखों में घुस गई। बुरा हाल हो गया सबका। हम लोगों को तुरंत आँगन में निकाला गया। वहाँ हम लोगों ने फौरन झाड़ू देने का फैसला किया।
    झाड़ू क्योंकि एक थी और तनख्वाह लेनेवाले उम्मीदवार बहुत, इसलिए क्षण-भर में बाबू झाड़ू के पुर्जे उड़ गए। जितनी सींके जिसके हाथ पड़ी. वह उनसे ही उलटे-सीधे हाथ मारने लगा। अम्मा ने सिर पीट लिया। भई, ये बुजुर्ग काम करने दें तो इंसान काम करे। जब झरा-जरा सी बात पर टोकने लगे तो बस, हो चुका काम। 

    काम करने के बारे में बच्चों का क्या विचार था?
    • काम कैसे करें।
    • वे काम करते-करते थक गए।
    • बड़ों की डाँट से परेशान थे
    • ये बुजुर्ग काम करने दें तो करें।

    Easy
    Question 34
    CBSEENHN8001158

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    दिन-भर की भूखी भेड़ें दाने का सूप देखकर जो सबकी सब झपटीं तो भागकर जाना कठिन हो गया। लश्टम-पश्टम तख्तों पर चढ़ गई। पर भेड़-चाल मशहूर है। उनकी नज़र तो बस दाने के सूप पर जमी हुई थी। पलंगों को फलाँगती, बरतन लुढ़काती साथ-साथ चढ़ गई।
    तख्त पर बानी दीदी का दुपट्टा फैला हुआ था जिस पर गोखरी, चंपा और सलमा-सितारे रखकर बड़ी दीदी मुगलानी बुआ को कुछ बता रही थीं। भेड़ें बहुत निःसंकोच सबको रौंदती, मेंगनों का छिड़काव करती र्हुई दौड़ गई।
    जब तूफ़ान गुजर चुका तो ऐसा लगा जैसे जर्मनी की सेना टैंकों और बमबारों सहित उधर से छापा मारकर गुजर गई हो। जहाँ-जहाँ से सूप गुजरा, भेड़ें शिकारी कुत्तों की तरह गंध सूँघती हुई हमला करती गई।

    भेड़ों ने ऊधम क्यों मचाया?

    • वे बच्चों से डर गई थीं।
    • वे दाने को देखकर भागी थीं क्योंकि वे दिन भर की भूखी थीं।
    • बच्चे उन्हें जान बूझकर घर में लाए थे।
    • बच्चे उन्हें संभाल न पा रहे थे।

    Easy
    Question 35
    CBSEENHN8001159

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    दिन-भर की भूखी भेड़ें दाने का सूप देखकर जो सबकी सब झपटीं तो भागकर जाना कठिन हो गया। लश्टम-पश्टम तख्तों पर चढ़ गई। पर भेड़-चाल मशहूर है। उनकी नज़र तो बस दाने के सूप पर जमी हुई थी। पलंगों को फलाँगती, बरतन लुढ़काती साथ-साथ चढ़ गई।
    तख्त पर बानी दीदी का दुपट्टा फैला हुआ था जिस पर गोखरी, चंपा और सलमा-सितारे रखकर बड़ी दीदी मुगलानी बुआ को कुछ बता रही थीं। भेड़ें बहुत निःसंकोच सबको रौंदती, मेंगनों का छिड़काव करती र्हुई दौड़ गई।
    जब तूफ़ान गुजर चुका तो ऐसा लगा जैसे जर्मनी की सेना टैंकों और बमबारों सहित उधर से छापा मारकर गुजर गई हो। जहाँ-जहाँ से सूप गुजरा, भेड़ें शिकारी कुत्तों की तरह गंध सूँघती हुई हमला करती गईं।

    भेड़-चाल से आप क्या समझते हो?

     

    • तेज गति में भागना
    • एक को देखकर सभी का वैसे ही करना
    • धीरे-धीरे चलना 
    • लक्ष्य्राप्त किए बिना न रुकना।

    Easy
    Question 36
    CBSEENHN8001160

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    दिन-भर की भूखी भेड़ें दाने का सूप देखकर जो सबकी सब झपटीं तो भागकर जाना कठिन हो गया। लश्टम-पश्टम तख्तों पर चढ़ गई। पर भेड़-चाल मशहूर है। उनकी नज़र तो बस दाने के सूप पर जमी हुई थी। पलंगों को फलाँगती, बरतन लुढ़काती साथ-साथ चढ़ गई।
    तख्त पर बानी दीदी का दुपट्टा फैला हुआ था जिस पर गोखरी, चंपा और सलमा-सितारे रखकर बड़ी दीदी मुगलानी बुआ को कुछ बता रही थीं। भेड़ें बहुत निःसंकोच सबको रौंदती, मेंगनों का छिड़काव करती र्हुई दौड़ गई।
    जब तूफ़ान गुजर चुका तो ऐसा लगा जैसे जर्मनी की सेना टैंकों और बमबारों सहित उधर से छापा मारकर गुजर गई हो। जहाँ-जहाँ से सूप गुजरा, भेड़ें शिकारी कुत्तों की तरह गंध सूँघती हुई हमला करती गईं।

    बानी दीदी दुपट्टा फैलाकर क्या कर रही थी?

    • कड़ाई कर रही थी।
    • सिलाई-कटाई का सजाने का सामान उस पर रखकर मुगलानी दीदी को दिखा रही थी।
    • उसे सही तरह से लपेट रही थी।
    • उसे रंगने का विचार बना रही थी।

    Easy
    Question 37
    CBSEENHN8001161

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    दिन-भर की भूखी भेड़ें दाने का सूप देखकर जो सबकी सब झपटीं तो भागकर जाना कठिन हो गया। लश्टम-पश्टम तख्तों पर चढ़ गई। पर भेड़-चाल मशहूर है। उनकी नज़र तो बस दाने के सूप पर जमी हुई थी। पलंगों को फलाँगती, बरतन लुढ़काती साथ-साथ चढ़ गई।
    तख्त पर बानी दीदी का दुपट्टा फैला हुआ था जिस पर गोखरी, चंपा और सलमा-सितारे रखकर बड़ी दीदी मुगलानी बुआ को कुछ बता रही थीं। भेड़ें बहुत निःसंकोच सबको रौंदती, मेंगनों का छिड़काव करती र्हुई दौड़ गई।
    जब तूफ़ान गुजर चुका तो ऐसा लगा जैसे जर्मनी की सेना टैंकों और बमबारों सहित उधर से छापा मारकर गुजर गई हो। जहाँ-जहाँ से सूप गुजरा, भेड़ें शिकारी कुत्तों की तरह गंध सूँघती हुई हमला करती गईं।

    भेड़ों के निकल जाने के बाद का क्या नजारा था?

    • घर वाले माथा पीटने लगे।
    • चारों तरफ मिट्टी ही मिट्टी थी।
    • सब कुछ उथल-पुथल हो गया।
    • बच्चे थककर बैठ गए।

    Easy
    Question 38
    CBSEENHN8001162

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    दिन-भर की भूखी भेड़ें दाने का सूप देखकर जो सबकी सब झपटीं तो भागकर जाना कठिन हो गया। लश्टम-पश्टम तख्तों पर चढ़ गई। पर भेड़-चाल मशहूर है। उनकी नज़र तो बस दाने के सूप पर जमी हुई थी। पलंगों को फलाँगती, बरतन लुढ़काती साथ-साथ चढ़ गई।
    तख्त पर बानी दीदी का दुपट्टा फैला हुआ था जिस पर गोखरी, चंपा और सलमा-सितारे रखकर बड़ी दीदी मुगलानी बुआ को कुछ बता रही थीं। भेड़ें बहुत निःसंकोच सबको रौंदती, मेंगनों का छिड़काव करती र्हुई दौड़ गई।
    जब तूफ़ान गुजर चुका तो ऐसा लगा जैसे जर्मनी की सेना टैंकों और बमबारों सहित उधर से छापा मारकर गुजर गई हो। जहाँ-जहाँ से सूप गुजरा, भेड़ें शिकारी कुत्तों की तरह गंध सूँघती हुई हमला करती गईं।

    भेड़ों की तुलना जर्मनी सेना से क्यों की गई?

    • उनकी चलने की तेजी व उथल-पुथल मचाने के कारण 
    • उनके शोर करने के कारण
    • उनको देखकर सभी के सहम जाने के कारण
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 39
    CBSEENHN8001163

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफ़ान में फँसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

    इस गद्याशं में बच्चे क्या करना चाहते हैं।

    • चाचाजी को परेशान करना चाहते हैं।
    • दूध दुहना चाहते हैं।
    • भैंस को बाँधना चाहते हैं।
    • भैंस को भगाना चाहते है।

    Easy
    Question 40
    CBSEENHN8001164

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफ़ान में फँसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

    बच्चों ने क्या तय किया?


    • भैंस का दूध दुहने के लिए उसके आगे व पीछे के पैरों को बाँध दिया जाए।
    • दूध दुहने हेतु चाचाजी की मदद ले लें।
    • कुछ बच्चे भैंस को पकड़े रखें व कुछ मिलकर दूध दुह लें।
    • भैसों को भगा दें।

    Easy
    Question 41
    CBSEENHN8001165

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफ़ान में फँसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

    भैंस के पैर कैसे बाँधें गए?


    • आंगन में पानी के मटकों से।
    • आंगन में बनी दीवार के साथ।
    • दो पैर झूले की रस्सी से व दो चाचाजी की चारपाई से
    • इनमें से कोई नहीं।

    Easy
    Question 42
    CBSEENHN8001166

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफ़ान में फँसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

    भैंस ने चौकन्ने होने पर क्या किया?

    • आराम से खड़ी रही।
    • जोर-जोर से रंभाने लगी।
    • बच्चों के पीछे पड़ गई।
    • तेजी से भाग गई।

    Easy
    Question 43
    CBSEENHN8001167

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    तय हुआ कि भैंस की अगाड़ी-पिछाड़ी बाँध दी जाए और फिर काबू में लाकर दूध दुह लिया जाए। बस, झूले की रस्सी उतारकर भैंस के पैर बाँध दिए गए। पिछले दो पैर चाचा जी की चारपाई के पायों से बाँध, अगले दो पैरों को बाँधने की कोशिश जारी थी कि भैंस चौकन्नी हो गई। छूटकर जो भागी तो पहले चाचा जी समझे कि शायद कोई सपना देख रहे हैं। फिर जब चारपाई पानी के ड्रम से टकराई और पानी छलककर गिरा तो समझे कि आँधी-तूफ़ान में फँसे हैं। साथ में भूचाल भी आया हुआ है। फिर जल्दी ही उन्हें असली बात का पता चल गया और वह पलंग की दोनों पटियाँ पकड़े, बच्चों को छोड़ देनेवालों को बुरा-भला सुनाने लगे।

    चाचाजी क्या सोच रहे थे? असली बात पता चलने पर उन्होंने क्या किया?

    • कोई सपना देख रहे हैं
    • चारपाई ड्रम से टकराने पर उन्हें लगा आँधी-तूफान आ रहा है।
    • जब उन्हें पता चला कि चारपाई भैंस से बंधी है तो बच्चों को बुरा-भला कहने लगे।
    • दिए गए सभी।

    Easy
    Question 44
    CBSEENHN8001168

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    घर में तूफ़ान उठ खड़ा हुआ। ऐसा लगता था जैसे सारे घर में मुर्गियाँ, भेडें, टूटे हुए तसले, बालटियाँ, कटोरे और बच्चे थे। बच्चे बाहर किए गए। मुर्गियाँ बाग में हँकाई गई। मातम-सा मनाती तरकारी वाली के आँसू पोंछे गए और अम्मा आगरा जाने के लिए सामान बाँधने लगीं।

    “या तो बच्चा-राज कायम कर लो या मुझे ही रख लो। नहीं तो मैं चली मायके,” अम्मा ने चुनौती दे दी।

    घर में तूफ़ान क्यों आया?

    • क्योंकि तेज आँधी चल रही थी।
    • क्योंकि भेड़ें घूम रही थी।
    • क्योंकि बच्चों ने कोई भी काम तरीके से नहीं किया था।
    • क्योंकि बच्चों के काम से नाखुश होकर सभी चिल्ला रहे थे।

    Easy
    Question 45
    CBSEENHN8001169

    नीचे लिखे गद्यांश को पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
    घर में तूफ़ान उठ खड़ा हुआ। ऐसा लगता था जैसे सारे घर में मुर्गियाँ, भेडें, टूटे हुए तसले, बालटियाँ, कटोरे और बच्चे थे। बच्चे बाहर किए गए। मुर्गियाँ बाग में हँकाई गई। मातम-सा मनाती तरकारी वाली के आँसू पोंछे गए और अम्मा आगरा जाने के लिए सामान बाँधने लगीं।

    “या तो बच्चा-राज कायम कर लो या मुझे ही रख लो। नहीं तो मैं चली मायके,” अम्मा ने चुनौती दे दी।

    तूफ़ान का रूप क्या था?

    • बच्चों का इधर-उधर भागना।
    • अम्मा का चिल्लाना।
    • सारे घर में मुर्गियाँ, भेडें, टूटे हुए तसले. बालटियाँ, लोटे, कटोरे और बच्चे बिखरे परे थे।
    • तरकारी वाली की तरकारी बिगड़ना।

    Easy
    Question 46
    CBSEENHN8001170