व्यापार से साम्राज्य तक

  • Question 9
    CBSEHHISSH8008143

    सही और गलत बताएँ:

    A.

    अंग्रेज़ों ने अपने कब्ज़े वाले इलाकों में कोई शासकीय बदलाव नहीं किए।

    Solution
    A. असत्य
    Question 10
    CBSEHHISSH8008144

    यूरोपीय व्यापारिक कंपनियाँ भारत की तरफ क्यों आकर्षित हो रही थी?

    Solution

    यूरोपीय कम्पनियों ने भारत के साथ व्यापार में आपार संभावनाएँ देखीं:
    (क) भारत में निर्मित अच्छे गुणों के कपास और रेशम का यूरोप में बड़ा बाजार था।
    (ख) भारतीय मसालें जैसे कि काली मिर्च, लौंग, इलायची और दालचीनी काफी मांग में थी।

    Question 11
    CBSEHHISSH8008145

    बंगाल के नवाबों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच किन बातों पर विवाद थे?  

    Solution

    बंगाल के नवाबों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच निम्नलिखित बातों पर विवाद थे -
    1. (क) बंगाल नवाबों ने अपनी शक्ति और स्वायत्तता पर जोर दिया और नवाबों ने कंपनी को छूट देने से मना कर दिया था।
    (ख) उन्होंने कंपनी को व्यापारिक अधिकार देने के लिए बहुत अधिक धनराशि की माँग की।
     
    (ग) उन्होंने कंपनी को सिक्का ढालने का अधिकार देने से मना कर दिया तथा किलाबंदी का विस्तार करने से रोक दिया।
    (घ) नवाबों ने कंपनी पर धोखा देने, सरकार को भारी मात्रा में राजस्व से वंचित करने, कर अदा नही करने के साथ साथ अनादरणीय पत्र लिखने का आरोप लगाया।
    2. दूसरी तरफ कंपनी ने भी नवाबों पर निम्नलिखित आरोप लगाए-
    (क) नवाब के स्थानीय अधिकारियों की अनुचित माँग कंपनी के व्यापार को नष्ट कर रहे थे।
    (ख) कंपनी को अत्यधिक चुंगी कर देना पड़ रहा था।
    (ग) कंपनी को अपनी आबादी बढ़ाने तथा कीलों के पुनःनिर्माण की अनुमति नहीं थी।

    Question 12
    CBSEHHISSH8008146

    दीवानी मिलने से ईस्ट इंडिया कंपनी को किस तरह फायदा पहुँचा?

    Solution

    दीवानी मिलने से ईस्ट इंडिया कंपनी को निम्नलिखित रूप में फायदा पहुँचा-
    (क) दीवानी मिलने के कारण कंपनी को बंगाल के विशाल राजस्व संसाधनों पर नियंत्रण मिल गया। 
    (ख) इसने पूर्व में होने वाली कंपनी की बड़ी समस्या का समाधान किया।
    (ग) भारत में चीज़ों को खरदीने के लिए ब्रिटेन को अब सोना-चाँदी नहीं माँगना पड़ता था।
    (घ) बंगाल से प्रपात राजस्व में कंपनी अब भारत में सूती और रेशमी कपड़ा खरीद सकती थी, अपनी फ़ौजों को सँभाल सकती थी और कलकत्ता में किले और दफ्तर के निर्माण की लागत उठा सकती थी।

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