विभाजन को समझना

  • Question 9
    CBSEHHIHSH12028370

    बँटवारे के सवाल पर कांग्रेस की सोच कैसे बदली?

    Solution

    भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस प्रारंभ से ही विभाजन का विरोध करती रही थी। किन्तु अंत में परिस्थितियों से विवश होकर उसे अपनी सोच बदलनी पड़ी और विभाजन के लिए तैयार होना पड़ा। कांग्रेस की सोच में बदलाव के लिए निम्नलिखित  परिस्थितियाँ ज़िम्मेदार है:

    1. कांग्रेस मंत्रिमंडल व लीग में मतभेद: 1937 के चुनावों में सफलता के पश्चात कांग्रेस ने प्रांतों में सरकार बनाई परंतु कुछ प्रांतों में यह स्थिति थी कि कांग्रेस सत्ता पक्ष में तथा मुस्लिम लीग के सदस्य विपक्ष में थे। फलत: लीग व कांग्रेस में दूरियाँ भी बढ़ीं। यहाँ तक की जब 22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस सरकारों ने त्यागपत्र दिया तो लीग ने मुक्ति दिवस मनाया।
    2. पाकिस्तान प्रस्ताव: 1937 के पश्चात जिन्ना की राजनीती पूरी तरह से उग्र-संप्रदायिकता की राजनीति थी। उन्होंने कांग्रेस राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध जहर उगलना शुरू कर दिया था। उन्होंने दुष्प्रचार किया कि कांग्रेस का आला कमान दूसरे सभी समुदाय और संस्कृतियों को पूरी तरह नष्ट करने तथा हिंदू राज्य कायम करने की फ़िराक में हैं। 1940 में जिन्ना ने अपने द्वि-राष्ट्रीय सिद्धांत को मुस्लिम जनता के सामने रखा। लीग का कहना था कि यदि भारत एक राज्य रहता है तो बहुमत के शासन के नाम पर सदा हिंदू शासन रहेगा। इसका अर्थ होगा इस्लाम के बहुमूल्य तत्व का पूर्ण विनाश और मुसलमानों की दासता। 1940 में लीग ने लाहौर में 'पाकिस्तान प्रस्ताव' पास किया। इससे स्थितियों में बदलाव आया। 
    3. वेवल योजना की विफलता: द्वित्य विश्वयुद्ध के पश्चात वायसराय वेवल ने अपनी कार्यकारिणी में भारतीयों को शामिल करने के लिए शिमला में एक सम्मेलन बुलाया गया। परंतु लीग की हठधर्मिता के कारण यह योजना असफल हो गयी। लीग की यह अपेक्षा थी परिषद के सभी मुस्लिम सदस्य उसके द्वारा चुने जाएँ जिस कारण कांग्रेस व लीग में कटुता बढ़ी। 
    4. कैबिनेट मिशन की असफलता: मुस्लिम लीग ने सांप्रदायिक समस्या के निवारण का एक मात्र हल पाकिस्तान की मांग को बताया था। किन्तु कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की मांग को अस्वीकार कर एक भारतीय संघ का प्रस्ताव रखा। इस योजना को कांग्रेस तथा लीग दोनों ने स्वीकार कर लिया। यह विभाजन का एक संभावित विकल्प था। परंतु बाद में मतभेद उभर गए तथा लीग ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसकी अस्वीकृति और असफलता के बाद विभाजन अपरिहार्य हो गया था।
    5. संप्रदायिक दंगे: कैबिनेट योजना की असफलता के पश्चात लीग ने 16 अगस्त,1946 को 'प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस' घोषित किया तथा 'लड़कर लेंगे पाकिस्तान' का नारा दिया। इसके साथ ही कोलकाता में सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए जो 20 अगस्त तक चल रहे। साथ ही हजारों लोग विस्थापित हो गए। दंगों ने सारे देश को दहला दिया। कानून और व्यवस्था बिल्कुल चरमरा गई तथा देश में ग्रह-युद्ध जैसे हालत पैदा हो गए थे। इससे कांग्रेस की सोच में पूरी तरह बदलाव आ चूका था।

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