विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

  • Question 33
    CBSEHHISCH10015313

    कोई विद्युत् रोधी ताँबे की तार की कुंडली किसी गैल्वेनोमीटर से संयोजित है। क्या होगा यदि कोई छड़ चुम्बक  
    (i) कुंडली में धकेला जाता है?
    (ii) कुंडली के भीतर से बाहर खींचा जाता है? 
    (iii) कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है? 

    Solution

    (i) यदि किसी छड़ चुंबक को कुंडली में धकेला जाता है तो गैल्वेनोमीटर की सुई में क्षणिक विक्षेपण होगा।
    (ii) जब उस छड़ चुंबक को कुंडली से बाहर खींचा जाता है तो गैल्वेनोमीटर में क्षणिक विक्षेपण होगा पर पहले वाले की विपरीत दिशा में।. 
    (iii) यदि चुंबक को कुंडली के भीतर स्थिर रखा जाता है तो कुंडली में कोई विद्युत् धारा उत्पन्न नहीं होती और गैवेनोमीटर कोई विक्षेपण नहीं दिखाता। 

    Question 34
    CBSEHHISCH10015314

    दो वृत्ताकार कुंडली A और B एक दुसरे के निकट स्थित हैं। यदि कुंडली A में विद्युत् धारा में कोई परिवर्तन करें, तो क्या कुंडली B में कोई विद्युत् धारा प्रेरित होगी? कारण लिखिए। 

    Solution
    हाँ। यदि कुंडली A में विद्युत् धारा में कोई परिवर्तन करें तो उसके निकट की चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होगा जो कुंडली B के निकट है जिससे कुंडली B में विद्युत् धारा प्रेरित होगी। 
    Question 35
    CBSEHHISCH10015315

    निम्नलिखित की दिशा को निर्धारित करने वाला नियम लिखिए-
    (i) किसी विद्युत् धारा वाही सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र। 
    (ii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में, क्षेत्र के लंबवत स्थित विद्युत् धारावाही सीधे चालक पर आरोपित बल।
    (iii) किसी चुंबकीय क्षेत्र में किसी कुंडली के घूर्णन करने पर उस कुंडली में उत्पन्न प्रेरित विद्युत् धारा।

    Solution

    (i) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम- यदि दाहिने हाथ में विद्युत् धारा वाही चालक पकड़ा गया है तो दाहिने हाथ का अंगुष्ठ विद्युत् धारा की दिशा की ओर संकेत करता है और दाहिने हाथ की उंगलियों का घुमाव चुंबकीय क्षेत्र की ओर संकेत करेगा। 
    (ii) फ्लेमिंग का वामहस्त नियम- अपने बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्य उंगली को इस प्रकार फैलाएँ कि वे एक दूसरे के परस्पर लंबवत हों और एक दूसरे के साथ समकोण बनाएँ। अब तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र कि दिशा निर्दिष्ट करेगी, मध्य उंगली विद्युत् धारा की दिशा और अंगूठा विद्युत् चालक पर लग रहे बल की दिशा बताएंगे।
    (iii) फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम- यदि दाएँ हाथ की तर्जनी, मध्य उंगली और अंगूठे को इस प्रकार फैलाएँ कि सभी परस्पर एक दूसरे के लंबवत हों और सभी एक दूसरे के साथ समकोण बनाएँ तो तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा, मध्य उंगली विद्युत् धारा की दिशा और अंगूठा विद्युत् चालक पर लगे बल की दिशा निर्दिष्ट करता है।

    Question 36
    CBSEHHISCH10015316

    किसी विद्युत् परिपथ में लघु पथन कब होता है?

    Solution

    जब विद्युत् पथ में विद्युन्मय तार और उदासीन तार संपर्क में आती हैं तो प्रतिरोध शून्य हो जाने के कारण लघु पथन हो सकता है। इसके कारण आग लग सकती है और विद्युत् पथ में लगे उपकरण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। 

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