विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

  • Question 37
    CBSEHHISCH10015317

    भू- संपर्क तार का क्या कार्य है? धातु के आवरण वाले विद्युत् साधित्रों को भू- संपर्कित करना क्यों आवश्यक है? 

    Solution

    भू-संपर्क तार हरे रंग के विद्युत् रोधी आवरण से ढ़की रहने वाली वह सुरक्षा तार है जो घर के निकट भूमि के भीतर बहुत गहराई में दबी धातु की प्लेट से संयोजित रहती है और अल्प प्रतिरोध का चालन पथ प्रस्तुत करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि साधित्र के धात्विक आवरण में विद्युत् धारा का कोई क्षरण होने पर उस साधित्र का विभव भूमि के विभव के बराबर हो जाएगा (यानी शून्य) और इसे इस्तेमाल कर रहा व्यक्ति तीव्र विद्युत् आघात से बच जाएगा।

    Question 38
    CBSEHHISCH10015318

    नामांकित आरेख खींचकर किसी विद्युत् जनित्र का मूल सिद्धांत तथा कार्य विधि स्पष्ट कीजिए। इसमें ब्रुशों का क्या कार्य है? 

    Solution

    विद्युत् जनित्र एक प्रकार का यंत्र है जो यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्तित विद्युत् धारा में परिवर्तित करता है।

    सिद्धांत:
    प्रत्यावर्तित विद्युत् जनित्र विद्युतचुंबकीय प्रेरण के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब एक कुंडली समानांतर चुंबकीय क्षेत्र में घूर्णन करती है, तो चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं कुंडली से गुजरती हैं और विद्युत् प्रेरित करती हैं और इसमें विद्युत् स्थापित करती हैं।

    रचना: इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं-
    1. चुंबक: एक शक्तिशाली अवतल बेलनाकार चुंबक जैसे नाल चुंबक का कार्य है शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाना।
    2. कुंडली: एक आयताकार लोहे के टुकड़े पर तांबे की तार लपेटकर उसे कुंडली का रूप दिया जाता है। जिसमें विद्युत् धारा प्रवाह की जाती है और इसे चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है जिससे इस पर बल लगता है और ये अपने अक्ष पर घूमता है। चित्र में ABCD कुंडली को दर्शाया गया है।
    3. विभक्त वलय: यह अर्धगोल छल्ले होते हैं। ये कुंडली के दोनों सिरों से परस्पर जुड़े होते हैं और कुंडली के अर्ध घूर्णन के साथ ये भी घूर्णन करती हैं। चित्र में इन्हें S1 और S2 से दर्शाया गया है।
    4. ब्रुश: B1 और B2 दो कार्बन या लचीले धातु की छड़ें हैं जो अर्धगोल छल्लों से परस्पर जुड़े होते हैं और इनका काम विद्युत् धारा को लोड तक ले जाना है। चित्र में इन्हें गैल्वेनोमीटर से जोड़ा गया है जो विद्युत् धारा को मापता है।


    चित्र: प्रत्यावर्तित विद्युत् जनित्र

    कार्य: मान लीजिये एक कुंडली ABCD क्षैतिज अवस्था में है। अब कुंडली दक्षिणार्थ घूर्णन कर रही है कुंडली चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं को काटती है। कुंडली का AB भाग ऊपर की तरफ और CD भाग नीचे की तरफ घूमता है। फ्लेमिंग के दक्षिण हस्त नियम के अनुसार विद्युत् कुंडली के AB भाग में A से B और CD भाग में C से D ABCD की दिशा में प्रेरित होगा। प्रेरित विद्युत् परिपथ में ब्रुश B2 से B1 की तरफ जाएगा।

    कुंडली के आधे घूर्णन के बाद, CD भाग ऊपर की तरफ और AB भाग नीचे की तरफ घूर्णन करेगा। प्रेरित विद्युत् अब उत्क्रमित दिशा में प्रवाहित होगी यानी DCBA की तरफ से। विद्युत् B1 से B2 की दिशा में प्रवाहित होगा। यानी कुंडली के हर आधे घूर्णन के बाद विद्युत् की दिशा उत्क्रमित हो जाएगी। यह विद्युत् जो हर बराबर के अंतराल के बाद अपनी दिशा परिवर्तित करती है, प्रत्यावर्तित विद्युत् कहलाती है। और यह यंत्र प्रत्यावर्तित विद्युत् जनित्र कहलाता है।


    Question 39
    CBSEHHISCH10015494

    a) जूल का तापन नियम लिखिए।

    b) दो विद्युत लैम्प जिनमें से एक का अनुमतांक 100 W; 220 V तथा दूसरे का 60 W; 220V है, किसी विद्युत मेस के साथ पार्श्वक्रम में संयोजित हैं । यदि विद्युत आपूर्ति की वोल्टता 220V है, तो दोनो बल्वों द्वारा विद्युत मेंस से कितनी धारा ली जाती है?

    Solution

    किसी प्रतिरोधक मे उत्पन्न होने वाली ऊष्मा

    (i) दिए गए प्रतिरोधक मे प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा के वर्ग के-व्यूत्क्रमानुपाती, (ii) दी गयी विद्युत धारा केलिए प्रतिरोध केअनुक्रमानुपाती तथा (iii)उस समय केअनुक्रमानुपाती होती है जिसके लिए दिए गए प्रतिरोध मे विद्युत धारा प्रवाहित होती है।

    H = I2RT

    पहले बल्व मे विद्युत धारा, I1 = P1V = 100 W220  V = 511 A  = 0.45 A

    दूसरे बल्व मे विद्युत धारा,

    I2 = P2V = 60 W220 V =311 A = 0.27 A

    Question 40
    CBSEHHISCH10015516

    फ्लेमिंग वामहस्त नियम लिखिए।

    Solution

    एक स्मृति सहायक विधि है जो चुम्बकीय क्षेत्र में स्थित किसी धारावाही चालक पर लगने वाले चुम्बकीय बल की दिशा बताने के लिये प्रयोग किया जाता है!

    यदि बायें हाथ की प्रथम तीन अंगुलियाँ एक-दूसरे के लम्बवत फैलायी जाँय और तर्जनी चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा में हो एवं मध्यमा चालक में बहने वाली धारा की दिशा में हो तो उस चालक पर लगने वाला चुम्बकीय बल अंगुठे की दिशा में होगा।

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