विकास

  • Question 5
    CBSEHHISSH10018468

    विकास मापने का यू. एन. डी. पी. का मापदण्ड किन पहलुओं में विश्व बैंक के मापदण्ड से अलग हैं?     

    Solution

    यूएनडीपी (संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम) देशों की तुलना उस देश के लोगों के शैक्षिक स्तर, उनके स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय प्रति वर्ष के आधार पर करता हैं। किन्तु उस देश के लोगों के शैक्षिक स्तर, उनके स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय प्रति वर्ष के आधार पर करता हैं किन्तु विकास को मापने के लिए विश्व बैंक द्वारा उपयोग किए जाना वाला मापदण्ड केवल प्रति व्यक्ति अथवा औसत आय हैं।
    संक्षेप में, मानव विकास मापदण्ड यूएनडीपी द्वारा उपयोग किया जाता है, जबकि विश्व बैंक द्वारा केवल आर्थिक विकास किया जाता है।

    Question 6
    CBSEHHISSH10018469

    हम औसत का प्रयोग क्यों करते हैं ? इनके प्रयोग करने की क्या कोई सीमाएँ हैं ?  विकास से जुड़े अपने उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए ।

    Solution

    हम औसत का प्रयोग इसलिए करते हैं क्योंकि दो देशों की आर्थिक स्थिति को जाने का यह सबसे अधिक सरल मापदंड हैं। किसी देश की आय को यदि उसकी कुल जनसंख्या से विभाजित कर दिया जाए तो हमें उसकी औसत आय प्राप्त हो जाती हैं। इसी प्रकार औसत विभिन्न विषयों के बारे में प्राप्त की जा सकती हैं।
    हालांकि 'औसतें' तुलना के लिहाज़ से उपयोगी हैं, इससे आसमानताएँ छुपती हैं।
    उदाहरण के लिए, दो 'देश क' और 'ख' देखते हैं। सरलता के लिए, हम जानते हैं की प्रत्येक देश में 5 निवासी हैं। निम्न तालिका में दिए आँकड़ों के अनुसार, दोनों देशों की औसत आय निकालिए।

     

    देश  2007 में नागरिकों की मानसिक आय (रुपए में )
      I II III IV V औसत 
    देश क  9500 10500 9800 10000 10200  10000
    देश ख 500 500 500 500 48000  10000

    क्या आपको दोनों देशों में रहने पर बराबर ख़ुशी होगी? क्या दोनों देश बराबर विकसित हैं? शायद हममें से कुछ लोग देश 'ख' में रहना पसंद करेंगे अगर हमें यह आश्‍वासन हो की हम उस देश के पाँचवें नागरिक होंगे। लेकिन अगर हमारी नागरिकता संख्या लॉटरी के ज़रिए निश्चित होगी तो शायद हममें से ज्यादातर लोग देश 'क' में रहना पसदं करेंगे। ऐसा इसलिए  क्योंकि हालांकि दोनों देशों की औसत आय एक सामान है, देश 'क' के लोग न तो बहुत अमीर हैं न बहुत गरीब, जबकि देश 'ख' के ज़्यादातर नागरिक गरीब हैं और एक व्यक्ति बहुत अमीर है । इसलिए हालाँकि औसत आय तुलना के लिए उपयोगी है इससे यह पता नहीं चलता कि यह आय लोगों में किस तरह वितरित हैं।

    Question 7
    CBSEHHISSH10018471

    प्रतिव्यक्ति आय कम होने पर भी केरल का मानव विकास क्रमांक पंजाब से ऊँचा है। इसलिए प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदण्ड बिल्कुल नहीं है और राज्यों की तुलना के लिए इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। क्या आप सहमत है। चर्चा कीजिए। 

    Solution

    पंजाब और केरल के कुछ तुलनात्मक आँकड़े:

    राज्य  शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 व्यक्ति (2003) साक्षरता दर % 2001  कक्षा 1 से 5 का निवल उपस्थिति अनुपात (1995-96)  प्रति व्यक्ति आय 2002-03
    पंजाब  49 70 81 26000
    केरल  11 91 91 22800

    में उपर्युक्त कथन से किसी सीमा तक सीमित हूँ- 
    (i) निसंदेह पंजाब की तुलना में केरल की प्रति व्यक्ति आय इस तालिका में दिए गए आँकड़ों के अनुसार कम है, लेकिन आय आँकड़ें जैसे की वर्ष 2002 में प्रति एक हज़ार शिशु मृत्यु दर केरल में मात्र 11 है तो उसी समय में पंजाब में यह दर काफी ऊँची अर्थात् 49 है जो केरल में अच्छी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्धि का प्रतीक हैं।
    (ii) इसी तरह साक्षरता दर प्रतिशत 2001 में केरल में 91 हैं तो पंजाब में उससे काफी निम्न हैं जो कि मात्र 70 हैं। यह केरल में उच्च साक्षरता या अच्छी शिक्षा सुविधाओं कि उपलब्धि का प्रतीक हैं।  
    (iii) प्राथमिक शिक्षा में छात्रों की उपस्थिति की दृष्टि से केरल की स्थिति पंजाब की अपेक्षा बेहतर है। पंजाब में 1995-96 में केवल अनुपात 81 छात्रों का है तो केरल में यह अनुपात 91 है। 

    Question 8
    CBSEHHISSH10018474

    भारत के लोगों द्वारा ऊर्जा के किन स्रोतों का प्रयोग किया जाता हैं? ज्ञात कीजिए। अब से 50 वर्ष पश्चात क्या सम्भावनाएँ हो सकती हैं?

    Solution

    भारत में ऊर्जा के अग्रलिखित स्रोतों का आजकल प्रयोग किया जाता हैं: मानव संसाधन , पशु साधन,  कोयला, विद्युत,  ताप विद्युत, जल विद्युत, पेट्रोल, डीजल, मिट्टी  का तेल, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक ऊर्जा परमाणु शक्ति ऊर्जा।
    पचास वर्षों के बाद संभावनाएं: पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों जैसे ऊर्जा के कुछ स्रोतों का भारत को संकट का सामना करना होगा। आज भी, भारत विदेश से आयातित तेल पर निर्भर करता है क्योंकि आज तक उसके पास पर्याप्त स्टॉक नहीं है। तेल और उससे संबंधित वस्तुओं की बढ़ती कीमतें हर किसी के लिए बोझ बन रही है। भारत को सौर ऊर्जा का उपयोग ऊर्जा के एक प्रमुख स्रोत के रूप में करना होगा या उसे नए विकल्पों को ख़ोजना होगा। 

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