विष्णु खरे

  • Question 17
    CBSEENHN12026639

    आपके विचार से मूक और सवाक् फिल्मों में से किसमें ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है और क्यों?

    Solution

    हमारे विचार से मूक फिल्मों में ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है क्योंकि इनमें भाषा का इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए ज्यादा-से-ज्यादा मानवीय होना पड़ता है। सवाक् फिल्मों के कॉमेडियन चार्ली तक नहीं पहुँच पाए। इसकी पड़ताल होनी बाकी है। मूक फिल्मों में सिर्फ हाव-भाव से ही अपनी बात कही जाती है जबकि सवाक् फिल्मों में आधा काम तो संवाद ही कर देते हैं। मूक अभिनय से दूसरों को हँसाना तो और भी कठिन काम है।

    Question 18
    CBSEENHN12026641

    सामान्यत: व्यक्ति अपने ऊपर नहीं हँसते, दूसरों पर हँसते हैं। कक्षा में ऐसी घटनाओं का जिक्र कीजिए जब-

    (क) आप अपने ऊपर हँसे हो ;

    (ख) हास्य करुणा में या करुणा हास्य में बदल गई हो।

    Solution

    (क) एक बार मैंने दूसरे को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया। उसने मुझे ही बेवकूफ बना दिया तब मुझे अपने ऊपर ही हँसी आ गई।

    (ख) एक बार की बात है कि किसी मित्र की हँसी उड़ा रहा था और उस पर हँस रहा था। उसे यह बात इतनी चुभ गई कि वह बेहोश होकर गिर पड़ा। तब मेरा हास्य करुणा में बदल गया। मुझे उसकी दशा पर बड़ी दया आई।

    Question 19
    CBSEENHN12026642

    चार्ली हमारी वास्तविकता हे, जबकि सुपरमैन स्वप्न आप इन दोनों में खुद को कहाँ पाते है?

    Solution

    चार्ली के अभिनय को देखकर लगता है कि अभिनय न होकर वास्तविकता है। सुपरमैन की संकल्पना स्वप्न जैसी है। मूलत: हम सभी चार्ली हैं। हम सुपरमैन हो ही नहीं सकते।

    हम इन दोनों में खुद को चार्ली के निकट पाते हैं क्योंकि वह हमारे जैसा है।

    Question 20
    CBSEENHN12026643

    भारतीय सिनेमा और विज्ञापनों ने चार्ली की छवि का किन-किन रूपों में उपयोग किया है? कुछ फिल्में [जैसे आवारा, श्री 420, मेरा नाम जोकर, मिस्टर इंडिया और विज्ञापनों (जैसे चोरी ब्लॉसम)] को गौर से देखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।

    Solution

    विद्यार्थी स्वयं करें।

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