विष्णु खरे

  • Question 29
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    चार्ली की वह क्या विशेषताएँ हैं जिन्हें अन्य कॉमेडियन छू तक नहीं पाए? चार्ली हमें कैसे लगते हैं?

    Solution

    चार्ली की अधिकांश फिल्में भाषा का इस्तेमाल नहीं करतीं इसलिए उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा मानवीय होना पड़ा। सवाक् चित्रपट पर कई बड़े-बड़े कॉमेडियन हुए हैं, लेकिन वे चैप्लिन की सार्वभौमिकता तक नहीं पहुँच पाए। चार्ली का चिर-युवा होना या बच्चों जैसा दिखना एक विशेषता तो है ही, सबसे बड़ी विशेषता शायद यह है कि वे किसी भी संस्कृति को विदेशी नहीं लगते। यानी उनके आसपास जो भी चीजें, अड़ंगे, खलनायक, दुष्ट औरतें आदि रहते हैं वे एक सतत ‘विदेश’ या ‘परदेस’ बन जाते हैं और चैप्लिन ‘हम’ बन जाते हैं। चार्ली के सारे संकटों में हमें यह भी लगता है कि यह ‘मैं’ भी हो सकता हूँ, लेकिन ‘मैं’ से ज्यादा चार्ली हमें ‘हम’ लगते हैं।

    Question 30
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    भारतीय परंपरा में अपने पर हँसने की क्या स्थिति है? इस क्षेत्र में चार्ली का भारत में क्या महत्त्व है?

    Solution

    एक होली का त्योहार छोड दें तो भारतीय परंपरा में व्यक्ति की अपने पर हँसने, स्वयं को जानते-बूझते हास्यास्पद बना डालने की परंपरा नहीं के बराबर है। गाँवों और लोक-संस्कृति में तब भी वह शायद हो, नागर-सभ्यता में बिल्कुल नहीं। चैप्लिन का भारत में महत्व यह है कि वह ‘अंग्रेजों जैसे’ व्यक्तियों पर हँसने का अवसर देता है। चार्ली स्वयं पर सबसे ज्यादा तब हँसता है जब वह स्वयं को गर्वोन्नत, आत्म-विश्वास से लबरेज, सफलता, सम्यता, संस्कृति तथा समृद्धि की प्रतिमूर्ति, दूसरों से ज्यादा शक्तिशाली तथा श्रेष्ठ, अपने ‘वज्रादपि कठोराणि’ अथवा ‘मृदूनि कुसुमादपि’ क्षण में दिखलाता है। तब यह समझिए कि कुछ ऐसा हुआ ही चाहता है कि यह सारी गरिमा, सुई-चुभे गुब्बारे जैसी फुस्स हो उठेगी।

    Question 31
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    चार्ली के जीवन पर प्रभाव डालने वाली दूसरी घटना का उल्लेख कीजिए। इसके बारे में चार्ली ने आत्मकथा में क्या लिखा है?

    Solution

    चार्ली के जीवन पर प्रभाव डालने वाली दूसरी घटना भी कम मार्मिक नहीं थी। बालक चार्ली उन दिनों एक ऐसे घर में रहता था जहाँ से कसाईखाना दूर नहीं था। वह रोज सैकड़ो जानवरों को वहाँ ले जाया जाता देखता था। एक बार एक भेड़ किसी तरह जान छुड़ाकर भाग निकली। उसे पकड़ने वाले उसका पीछा करते हुए कई बार फिसले, गिरे और पूरी सड़क पर ठहाके लगने लगे। आखिरकार उस गरीब जानवर को पकड़ लिया गया और उसे फिर कसाई के पास ले जाने लगे। तब चार्ली को अहसास हुआ कि उस भेड़ के साथ क्या होगा। वह रोता हुआ माँ के पास दौड़ा, ‘उसे मार डालेंगे, उसे मार डालेंगे।’ बाद में चैप्लिन ने अपनी आत्मकथा में लिखा है-वसंत की वह बेलास दोपहर और वह मजाकिया दौड़ कई दिनों तक मेरे साथ रही; और मैं कई बार सोचता हूँ कि उस घटना ही ने तो कहीं मेरी भावी फिल्मों की भूमिका तय नहीं कर दी थी-त्रासदी और हास्योत्पादक तत्त्वों के सामंजस्य की।

    Question 32
    CBSEENHN12026668

    राजकपूर ने किस बात से प्रेरित होकर फिल्मों में क्या प्रयोग किया?

    Solution

    राजकपूर ने चार्ली के नितांत अभारतीय सौंदर्यशास्त्र की इतनी व्यापक स्वीकृति देखकर भारतीय फिल्मों का एक सबसे साहसिक प्रयोग किया। उनकी फिल्म ‘आवारा’ सिर्फ ‘दि ट्रैंप’ का शब्दानुवाद ही नहीं थी बल्कि चार्ली का भारतीयकरण ही था। राजकूपर ने चैप्लिन की नकल करने के आरोपों की कभी परवाह नहीं की। राजकपूर के ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ के पहले फिल्मी नायकों पर हँसने की और स्वयं नायकों के अपने पर हँसने की परपरा नहीं थी। 1953-57 के बीच जब चैप्लिन अपनी गैर-ट्रैंपनुमा अंतिम फिल्में बना रहे थे तब राजकपूर चैप्लिन का युवा. अवतार ले रहे थे।

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