विदाई - संभाषण

  • Question 13
    CBSEENHN11012022

    नादिर से भी बढ्कर आपकी जिद्द हैं - कर्जन के संदर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए।

    Solution

    नादिरशाह तानाशाह था। उसने दिल्ली की जनता का कत्लेआम करवाया था। पर उसने आसिफजाह के तलवार गले में डालकर प्रार्थना करने पर उसे कत्लेआम को उसी समय रोक दिया था। लॉर्ड कर्जन के संदर्भ में हमें यह बात कुछ उचित नहीं लगती। लॉर्ड कर्जन को नादिरशाह से भी अधिक तानाशाह बताना उचित नहीं है। लॉर्ड कर्जन जिद्दी भले ही रहा हो, पर उतना तानाशाह नहीं था। बैग- भंग का दाग उस पर अवश्य है, पर ऐसा कोई कत्लेआम नहीं हुआ जैसा नादिरशाह के समय हुआ था। लेखक ने बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहने के लिए ही ऐसा कहा है।

    Question 14
    CBSEENHN11012023

    क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना और किसी की कुछ की कुछ न सुनने का नाम ही शासन है ?-इन पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए शासन क्या है? इस पर चर्चा कीजिए।

    Solution

    इन पंक्तियों से यह ध्वनित होता है कि अपनी मनमानी चलाना ही शासन व्यवस्था है। इसमें लोगों की बात अनसुनी कर दी जाती है। इस स्थिति को कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। शासन व्यवस्था में शासक और प्रजा दोनों की भागीदारी होती है। प्रजा को अपनी बात कहने का पूरा हक है। शासक को उसकी बात सुननी ही चाहिए। शासक मनचाहा व्यवहार नहीं कर सकता। दोनों के सहयोग से जो व्यवस्था चलती है, वही अच्छा शासन होता है।

    Question 15
    CBSEENHN11012024

    इस पाठ में आए अलिफ़ लैला, अलहदीन, अबुल हसन और बगदाद के खलीफा के बारे में सूचना एकत्रित कर कक्षा में चर्चा कीजिए।

    Solution

    अलिफलैला के अलहदीन ने चिराग रगड़कर इच्छित वस्तु पा ली थी। अबुल हसन बगदाद के खलीफा थे। उनकी शान निराली थी।

    छात्र इनके बारे में और अधिक जानकारी एकत्रित करें।

    Question 16
    CBSEENHN11012025

    इससे आपका जाना भी परंपरा की चाल से कुछ अलग नहीं है, तथापि आपके शासनकाल का नाटक घोर दुखांत है, और अधिक आश्चर्य की बात यह है कि दर्शक तो क्या, स्वयं सूत्रधार भी नहीं जानता था कि उसने जो खेल सुखांत समझकर खेलना आरंभ किया था, वह दुखांत हो जावेगा।

    Solution

    विद्यार्थी इन बातों पर गौर करें।

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