विदाई - संभाषण

  • Question 5
    CBSEENHn11012014

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिये:- 
    यहां की प्रजा ने आपकी जिद्द का फल यहीं देख लिया। उसने देख लिया कि आपकी जिस जिद्द ने इस देश की प्रजा को पीड़ित किया, आपको भी उसने कम पीड़ा न दी, यहाँ तक कि आप स्वयं उसका शिकार हुए। यहां की प्रजा वह प्रजा है, जो अपने दुख और कष्टों की अपेक्षा परिणाम का अधिक ध्यान रखती है। वह जानती है कि संसार में सब चीजों का अंत है। दुख का समय भी एक दिन निकल जावेगा, इसी से सब दुखों को झेलकर, पराधीनता सहकर भी वह जीती है। माई लॉर्ड! इस कृतज्ञता की भूमि की महिमा आपने कुछ न समझी और न यहां की दीन प्रजा की श्रद्धा- भक्ति अपने साथ ले जा सके, इसका बड़ा दुख है।
    1. किसने, किसकी जिद्द का फल देख लिया?
    2. भारत की प्रजा की क्या विशेषता बताई गई है?
    3. किसे, किस बात का दुख है?

    Solution

    1. भारत की प्रजा ने लॉर्ड कर्जन की जिद्द का फल देख लिया। इस प्रजा ने यह देखा कि कर्जन की जिद्द ने उन्हें काफी पीड़ित किया। लॉर्ड कर्जन स्वयं भी उसी पीड़ा के शिकार हुए।
    2. लेखक ने भारत की प्रजा की विशेषता बताते हुए कहा है कि यहाँ की प्रजा अपने दुख और कष्टों की अपेक्षा परिणाम का अधिक ध्यान रखती है उसे यह पता है कि संसार की सब चीजों का अंत होता है। वह यह जानकर दुखों को झेल जाती है कि दुख का समय भी एक दिन निकल जाएगा। यहाँ की प्रजा बड़ी धैर्यवान् एवं सहनशील है।
    3. भारत की प्रजा को इस बात का दुख है कि लॉर्ड कर्जन ने भारत- भूमि की महिमा को नहीं समझा और न उसने भारत की दीन प्रजा की श्रद्धा- भक्ति को स्वीकार किया। वे चाहते तो प्रजा की इस श्रद्धा- भक्ति को अपने साथ ले जा सकते थे। ऐसा न होने पर भारत की प्रजा को दुख है।

    Question 6
    CBSEENHN11012015

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिये:- 
    “अभागे भारत! मैंने तुझसे सब प्रकार का लाभ उठाया और तेरी बदौलत वह शान देखी, जो इस जीवन में असंभव है। तूने मेरा कुछ नहीं बिगाड़ा; पर मैंने तेरे बिगाड़ने में कुछ कमी न की। संसार के सबसे पुराने देश! जब तक मेरे हाथ में शक्ति थी, तेरी भलाई की इच्छा मेरे जी में न थी। अब कुछ शक्ति नहीं है, बो तेरे लिए कुछ कर सकूं। पर आशीर्वाद करता हूँ कि तू फिर उठे और अपने प्राचीन गौरव और यश का फिर से लाभ करे। मेरे बाद आने वाले तेरे गौरव को समझें।” आप कर सकते हैं और यह देश आपकी पिछली सब बातें मूल सकता है, पर इतनी उदारता माइ लॉर्ड में कहाँ?
    1. गद्याशं के प्रारंभिक वाक्यों में क्या व्यंग किया गया है?
    2. कौन क्या आशीर्वाद करता है?
    3. अंतिम वाक्य से किसके चरित्र पर क्या प्रकाश पड़ता है?

    Solution

    1. गद्यांश के प्रारंभिक वाक्यों में यह व्यंग्य किया गया है कि लॉर्ड कर्जन ने भारत से सभी प्रकार का लाभ उठाया। इसी देश की बदौलत उसकी शान ऊँची हुई। इसके बावजूद लॉर्ड कर्जन ने भारत का बुरा करने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी। यद्यपि यह देश अत्यंत प्राचीन है, पर लॉर्ड कर्जन ने कभी भी अपने मन में इसकी भलाई की बात नहीं सोची। अंत में उसके हाथों से शक्ति निकल गई।
    2. लेखक अपनी ओर से कहता है कि यदि लॉर्ड कर्जन जाते समय भी इस देश को यह आशीर्वाद देता जाता है कि जिस देश को उसने पतन की ओर बढ़ाया, वह आने वाले दिनों में फिर ऊपर उठे और अपने प्राचीन गौरव को पुन: प्राप्त करे। कर्जन के बाद आने वाले लॉर्ड इस देश के गौरव की कद्र करें। पर यह हो न सका।
    3. अंतिम वाक्य से लॉर्ड कर्जन के व्यक्तित्व पर यह प्रकाश पड़ता है कि वह एक जिद्दी किस्म का व्यक्ति था। यह सदा भारत का अहित सोचता और करता रहा। उसे अंतिम समय में भी अपने बुरे कामों के लिए पछतावा नहीं था। उसमें उदारता नाम की कोई चीज थी ही नहीं।

    Question 7
    CBSEENHN11012016

    शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

    Solution

    शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक यह कहना चाहता है कि भारत के लोग अत्यंत दयालु एवं भावुक हैं। वे स्वयं को दुख पहुँचाने वाले व्यक्ति के बिछुड़ने पर भी खुश होने के स्थान पर दुखी होते हैं। यहाँ तक कि इस देश के पशुओं में भी यही भावना पाई जाती है। भारत में बिछड़न का समय बड़ा करुणोत्पादक होता है; बड़ा पवित्र, बड़ा कोमल और बड़ा निर्मल होता है।

    Question 8
    CBSEENHN11012017

    आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया-यहां किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?

    Solution

    यहाँ बंग- भंग की ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है। लॉर्ड कर्जन ने अपनी जिद्द के कारण बंगाल का विभाजन कर दिया। इसके कारण बंगाल दो हिस्सों में बँट गया-पश्चिमी बंगाल और पूर्वी बंगाल। यहाँ के 8 करोड़ लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया था, पर लॉर्ड कर्जन अपनी जिद्द पर अड़े रहे। (यही पूर्वी बंगाल आगे चलकर बँगलादेश बना)।

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